Home विडियो एक हाथ में कुरान, दूसरे में कंप्यूटर के वादे का क्या हुआ:...

एक हाथ में कुरान, दूसरे में कंप्यूटर के वादे का क्या हुआ: ओवैसी

511
SHARE

मोदी सरकार के सरकारी नौकरी में मुसलमानों की भर्ती को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल किया कि मुझे पीएम बताएं कि अगर आप मुसलमानों के एक हाथ में कंप्यूटर और एक हाथ में कुरान देने का वादा करते हैं तो कितनों को नौकरी दी।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के बयान पर टिप्पणी करते हुए ओवैसी ने कहा कि नकवी झूठ बोल रहे हैं कि मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व बढ़ा है। इसलिए मैंने सरकार के इन गलत दावों का पर्दाफाश किया है। ओवैसी ने सवाल किया कि सरकार बताये 4 सालों में रेलवे और अर्धसैनिक बल में कितने अल्पसंख्यक भर्ती किए गए?

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय कार्यक्रम में 10 बिंदू में कहा गया कि राज्य में केंद्रीय सेवाओं, पुलिस की भर्ती में अल्पसंख्यकों को तरजीह देने की सरकार को सलाह दी गई है। बता दें कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अपने बयान मे कहा था कि, ‘अल्पसंख्यक लड़कियों की शिक्षा की खातिर मोदी सरकार युद्धस्तर पर काम कर रही।’

उन्होंने कहा कि दस्तावेज ये बताते हैं कि सीआईएसएफ में मुसलमानों को सिर्फ 3.7 फीसदी नौकरी मिली है। सीआरपीएफ में मुसलमान सिर्फ 5.5 हैं, रेपीड एक्शन फोर्स में 6.10 फीसदी मुसलमानों को नौकरी मिली है। क्या यह मल्टी कल्चरल है?

ओवैसी के आरोप को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का विकास सांप्रदायिक नहीं बल्कि समावेशी है। वह सभी को खुशहाली मिले, इस सिद्धांत पर काम कर रहे हैं।

नकवी ने कहा, अगर वह यह जानना चाहते हैं कि अल्पसंख्यकों के विकास के लिए क्या किया है? हम उनके ज्ञान को बढ़ाने के लिए इतना बता सकते हैं। जब मोदी की सरकार आई थी, तब केंद्र सरकार की नौकरियों में अल्पसंख्यकों की भागीदारी 4.5 से 6.00 फीसदी थी, लेकिन अब यह 10 फीसदी से ज्यादा है। हमने 1. 45 करोड़ अल्पसंख्यक छात्रों को स्कॉलरशिप दी है।

Loading...