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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दलितों को आरक्षण नहीं मिलने की है ये वजह

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बार फिर से संघ परिवार के निशाने पर है। बीजेपी ने इस बार दलित आरक्षण को मुद्दा बनाया है। इस सबंध मे आज राष्ट्रीय एससी आयोग के चेयरमैन राम शंकर कठेरिया ने एएमयू के पीवीसी, रजिस्ट्रार व स्थानीय प्रशासन के साथ आरक्षण पर जानकारी ली।

बैठक में एएमयू के सह कुलपति प्रोफेसर तबस्सुम शहाब ने कहा कि विश्वविद्घालय किसी भी तरह का कोई कोटा नहीं देता है। उन्होंने इस बैठक में कहा कि छात्रों को उनकी रैकिंग के हिसाब से एडमिशन दिया जाता है। एएमयू के सह कुलपति प्रोफेसर तबस्सुम शहाब ने बताया कि साल 2005 में एएमयू ने एक अपील दायर की थी कि अल्पसंख्यक छात्रों के लिए 50 प्रतिशत का आरक्षण होना चाहिए, जिसका मामला अभी भी विचारधीन चल रहा है।

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बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में आयोग अध्यक्ष ने बताया कि एएमयू सरकार और यूजीसी से ग्रांट लेने के बावजूद दलित और ओबीसी छात्रों को आरक्षण नहीं दे रहा है। प्रवेश नीति भी बदली है। आरक्षण का अनुपालन न करने, पर एक ही जबाव दिया गया है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। फिलहाल एएमयू को इस पर अपना पक्ष रखने, साक्ष्य पेश करने के लिए एक माह का समय दिया है। इस दौरान अगर जबाव नहीं मिला तो आयोग कार्रवाई करेगा।

कठेरिया का कहना है कि संसद में कभी नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक किसी ने एएमयू को अल्‍पसंख्‍यक संस्था का दर्जा नहीं दिया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी 1986 में दिए फैसले में कहा कि यह अल्‍पसंख्‍यक यूनिवर्सिटी नहीं है। यहां जानबूझकर अनुसूचित जाति के छात्रों आरक्षण से वंचित किया जा रहा है. कठेरिया ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट कहता है कि एएमयू अल्‍पसंख्‍यक संस्थान है तो वे अपनी मांगें वापस ले लेंगे।

एएमयू के ही पूर्व जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) डॉ. राहत अबरार ने इस मामले मे जानकारी देते हुए कहा कि एएमयू को अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा देने वाला आदेश विवादों में आने के बाद सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट ने भी केन्द्र सरकार और एएमयू प्रशासन को सुनने के लिए एएमयूमें यथा स्थिति बरकरार रखी हुई है। इसलिए जब तक कोर्ट कोई फैसला नहीं सुना देता है तब तक एएमयू में किसी भी तरह के नए आदेश को न तो लागू किया जा सकता है और न ही किसी पुराने फैसले को बदला जा सकता है।

आपको बता दें की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ दिन पहले कन्नौज में मुस्लिम विश्‍वविद्यालयों में दलितों के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाया था। उन्‍होंने कहा कि जो लोग दलितों के लिए चिंतित हैं, उन्‍हें इस मुद्दे को उठाना चाहिए। सीएम योगी ने सवाल किया था कि यदि बीएचयू में दलितों को आरक्षण दिया जा सकता है तो अल्‍पसंख्‍यकों द्वारा संचालित संस्‍थानों में क्‍यों नहीं?

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