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हापुड़ लिंचिंग मामले में पीड़िता ने कहा – पुलिस ने दबाव में लिखवाई झूठी एफआईआर

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पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के पिलखुआ थाना स्थित मदापुर गांव में कथित गोहत्या के आरोप में की गई बेदर्दी से पिटाई के दौरान मोहम्मद क़ासिम की मौत हो गई थी और मोहम्मद समीउद्दीन बुरी तरह जख़्मी हुए थे।

इस मामले मे चश्मदीद और पीड़ित कासिम ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होने कहा, मैं चश्मदीद गवाह हूं। मैंने देखा बझेड़ा गांव के लोगों ने कैसे पीट-पीटकर कासिम को मार डाला और मुझे भी पीट-पीट कर मरा हुआ मानकर ही छोड़ दिया था। वे सब झूठ बोल रहे थे कि कासिम गोकशी कर रहा था, न तो वहां से किसी को कोई गाय मिली, न ही मारने वाला कोई औजार। मुझ से आजतक पुलिस ने कोई बयान नहीं लिया। पुलिस ने झूठी एफआरआर दर्ज की है। मैंने आज इसे रद्द करके सीओ पवन कुमार सिंह पर कानूनी कार्रवाई करने और अपना बयान जुडिशियल मजिस्ट्रेट के आगे करवाने की मांग आईजी मेरठ राम कुमार से की है।

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वहीं हिंजालपुर गांव, पिलखुवा थाने के दिनेश तोमर ने आज खुलकर कहा कि पुलिस ने इस मामले में दोषियों को बचाने के लिए दबाव बनाया और गलत एफआईआर लिखवाई। दिनेश तोमर ने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि सीओ पी.के सिंह ने उनके सामने ही समयदीन के भाई यासीन से कहा कि जो मैं बोलूंगी वैसी ही रिपोर्ट लिखनी होगी, नहीं तो समयदीन के साथ तुम्हें और तुम्हारे परिवार के और आदमियों को गौकशी के मामले में फंसाकर जेल करा देंगे।

दिनेश ने बताया,`जिस तरह से सीओ पीके सिंह और पिलुखवा थाने की पुलिस ने कासिम की हत्या और समयदीन पर जानलेवा हमले को झूठा और गलत रिपोर्ट लिखवाकर एक मोटरसाइकिल टक्कर का रूप देने की कोशिश की, उसके बाद मुझे उस पर जरा भी विश्वास नहीं रह गया है।’

वहीं समयदीन के भाई यासीन ने बताया कि उन्हें अपनी और अपने परिवार वालों की जान का खतरा है। पुलिस इस मामले में उनका पक्ष सुनने को तैयार नहीं है और लगातार उन्हें झूठे मामले में फंसाने की बात कह रही है। यासीन ने तो यहां तक कहां कि वापस गांव जाना बहुत मुश्किल है। यासीन ने बताया कि थाने में भी लोग कह रहे थे कि अब मोदी-योगी की सरकार है, तुम लोगों की कोई सुनवाई नहीं होगी। उन्होंने भी आईजी मेरठ राम कुमार को यह लिखित अर्जी दी है कि उनका बयान भी जुडिशियल मेजिस्ट्रेट के यहां रिकॉर्ड कराया जाए।

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