सीएम योगी का बड़ा फैसला – 10 साल से पहले डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी तो देना होगा 1 करोड़ का जुर्माना

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी से जूझ रही योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के अनुसार, पीजी करने के बाद डॉक्टरों को अब कम से कम 10 साल तक सरकारी अस्पताल में सेवाएं देनी होंगी। यदि बीच में कोई नौकरी छोड़ता है तो उसे एक करोड़ रुपये की धनराशि जुर्माने के तौर देनी होगी।

अधिकारियों ने बताया कि अगर कोई डॉक्टर पीजी कोर्स बीच में ही छोड़ देता है तो उसे तीन साल के लिए डिबार कर दिया जाएगा। इन तीन सालों में वह दोबारा दाखिला नहीं ले सकेंगे। फैसले में यह भी कहा गया है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद चिकित्साधिकारी को तुरंत नौकरी जॉइन करनी होगी। इसके अलावा पीजी के बाद सरकारी डॉक्टरों को सीनियर रेजिडेंसी में रुकने पर भी रोक लगा दी गई है।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही सीएम आदित्यनाथ ने अफसरों को निर्देश दिए थे कि वे नवस्थापित मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की व्यवस्था करें। उन्होंने कहा था कि कोरोनावायरस के समय में निर्धारित संख्या में चिकित्सकों की उपलब्धता से मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधा प्राप्त होगी। सीएम योगी ने स्वीकृत मेडिकल कॉलेजों के निमार्ण की कार्यवाही को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।

दूसरी तरफ अब डॉक्टर पीजी कोर्सेज के साथ डिप्लोमा कोर्सेज में भी साथ ही साथ दाखिला ले सकते हैं। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने नीट (NEET) में छूट की भी व्यवस्था की है। ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में एक साल नौकरी करने के बाद एमबीबीएस डॉक्टरो को नीट प्रवेश परीक्षा में 10 अंकों की छूट दी जाती है। वहीं, दो साल सेवा देने वाले डॉक्टरों को 20 और तीन साल पर 30 अंको की छूट मिलती है।