क्या गोरखनाथ मंदिर के पास रह रहे मुस्लिम परिवारों से करवाए जा रहे घर खाली?

यूपी के गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर के पास रह रहे एक दर्जन से अधिक परिवारों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन की और से अपने घर खाली करने को कहा गया है। जिसमे ज़्यादातर मुसलमान है। परिवारों को एक ‘सहमति पत्र’ पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया था, जिसमें कहा गया कि वे अपने घर या जमीन को सरकार को सौंपने के लिए सहमत हैं। हालांकि  वे अपना घर-बार छोड़कर जाना नहीं चाहते है।

दरअसल, गोरखपुर मंदिर के आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा का हवाला देकर ये घर खाली कराये जा रहे है। सहमति पत्र पर अब तक 10 परिवार ने हस्ताक्षर किए है। जिनमे मोहम्मद फैजान ,मोहम्मद जाहिर ,मोहम्मद शकीर हुसैन निगांद खुर्शीद आलम के दो घर, मोहम्मद जमशेद आलम ,मुशीर अहमद, इकबाल अहमद,जावेद अख्तर और नूर मोहम्मद शामिल है। हालांकि फिलहाल एक परिवार ने हस्ताक्षर नहीं किए।

वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा योजना अभी प्रारंभिक चरण में है और किसी से जोर-जबरदस्ती नहीं की जा रही। स्थानीय डीएम विजयेंद्र पांडियन का कहना है कि इन लोगों को अपने घरों के बदले करोड़ो रुपए मिल रहे है। साथ ही जमीन भी दी जा रही है। इसलिए वह हस्ताक्षर कर रहे हैं। किसी से ज़ोर-जबर्दस्ती नहीं की गई।

इसी बीच इंडिया टुमारो डॉट इन पर इस बारे में खबर लिखने वाले रिपोर्टर मसिहुज्जमा अंसारी ने आरोप लगाया कि इस खबर के लिए जब उन्होंने डीएम का पक्ष जानने की कोशिश की कि तो डीएम के विजयेंद्र पांडियन ने उन पर रासुका लगाने की ध’मकी दी।

अंसारी ने ट्वीट कर कहा, ‘गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर से लगे मुस्लिम घरों को खाली करने की नोटिस दिए जाने के मामले में डीएम से बात करने पर मेरे साथ अभद्रता की गई और अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए एनएसए लगाने की धम’की दी गई जिसकी शिकायत मैने एनएचआरसी में दर्ज कराई है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, उत्तर प्रदेश में विपक्षी कांग्रेस पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष शाहनवाज आलम ने कहा, “अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, राज्य सरकार इन पत्रकारों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत अभियोग की धम’की दे रही है।”