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निपाह वायरस से निपटने के लिए पहले बुलाया अब डॉ. कफील को केरल सरकार ने मना किया

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गोरखपुर अस्पताल त्रासदी के दौरान बच्चों को ऑक्सीजन की सप्लाई देकर मासूमों की जान बचाने की सज़ा काटकर आये डॉ कफील खान ने केरल में तेज़ी से निपाह वायरस फैलने को लेकर केरल सरकार के लिए निराशा ज़ाहिर की है. उन्होंने केरल सरकार से निपाह वायरस का ईलाज करने की इजाज़त मांगी है. लेकिन केरल सरकार के अधिकारियों ने कहा कि वह केरल नहीं जा सकते क्योंकि वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा निलंबित कर दिये गये थे.

डॉ कफील खान जो गोरखपुर में मासूम बच्चों की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन का इंतज़ाम करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की थी. उन्होंने केरल में मदद करने की पेशकश की, जहां निपाह वायरस से अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी और यह संख्या बढ़ने पर ही है.

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डॉ खान ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा: मैंने सहरी खाने और फजर की नमाज़ पढने के बाद सोने की कोशिश की लेकिन मुझे नींद नहीं आई. सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर फैलते हुए निपाह वायरस की अफवाहों के कारण जो लगातार मौते हो रही है उनकी वजह से मैं सो नहीं पा रहा हूँ.

डॉ खान ने पोस्ट में लिखा कि, केरल के मुख्यमंत्री श्री पिनाराय विजयन से मुझे निर्दोष लोगों को बचाने के लिए कालीकट मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सेवा करने की इजाजत चाहए ताकि मैं उनकी जान बचा सकूं.  मैं निपाह से पीड़ित मरीजों का ईलाज करना चाहता हूँ फिर चाहे मेरी जान भी चली जाए मुझे कोई ग़म नहीं होगा. अल्लाह मुझे मानवता की हिफाज़त करने के लिए ज्ञान और कौशल दे.

हालांकि, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्नाथ की बीजेपी सरकार केरल जाने के लिए डॉ कफील अहमद खान को इजाज़त नहीं दे रही है और निपाह वायरस पीड़ितों का ईलाज करने से उनपर रोक लगा रही है.

डॉ. गणेश कुमार, कार्यकारी प्रिंसिपल बीआरडी मेडिकल कॉलेज ने डीएनए को बताया कि डॉ खान को पूर्व अनुमति के बिना केरल में पीड़ितों का करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. “अब तक, उन्होंने कॉलेज से कोई अनुमति मांगी नहीं है. डॉ. कुमार ने कहा, हम निदेशक जनरल मेडिकल एजुकेशन (डीजीएमई) से मंजूरी के बिना केरल में उन्हें  सेवाएं देने की कोई अनुमति नहीं देंगे.

डीजीएमई कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार के किसी भी अन्य अस्पताल में सेवा करने की कोई अनुमति नहीं थी जब वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी थे और निलंबन अवधि के दौरान आधा वेतन लेते थे.

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