Home धर्म ‘बिना चाँद देखे’ रोज़ा रखने के बारे में क्या है इस्लामी राय

‘बिना चाँद देखे’ रोज़ा रखने के बारे में क्या है इस्लामी राय

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इस्लाम में रमजान को सबसे पवित्र महीने के तौर पर देखा जाता है जिसकी शुरुआत चाँद देखने से होती और और चाँद देखने पर ही यह महिना खत्म होता है. चूँकि भारत में कुछ स्थानों पर आज पहला रोज़ा रखा गया है तथा कुछ स्थानों पर कल से रमजान की शुरुआत हो रही है. सोशल मीडिया पर नज़र डाले तो यूजर इस मामले पर काफी बहस करते नज़र आ रहे हैं.

सबसे बड़ी असमंजस की स्थिति सऊदी अरब के कारण हुई क्योंकी आमतौर पर सऊदी अरब में एक दिन पहले चाँद दिखाई देता हिया तथा एक दिन पहले ही ईद मनाई जाती है लेकिन इस बार ऐसा इत्तेफाक हुआ की सऊदी और भारत(कुछ स्थानों पर) में एक साथ रमजान का ऐलान किया गया. चूँकि हम जानते है की सऊदी अरब और भारत के समय में ढाई घंटे का फर्क है जिस समय हम यहाँ चादं देख रहे होते हैं और चाँद नज़र नही आता, उस वक़्त वहां असर का समय होता है तथा आमतौर पर विश्व के मध्य में होने के कारण तथा ढाई घंटे देरी के कारण एक हलकी सी झलक वहां दिखाई दे जाती है.

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sun moon earth

चाँद देखे जाने को लेकर पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब (स.अ.व.) की हदीसें.

हदीस -1 

“अल्लाह के नबी(स.) ने फरमाया की “जब तुम नया चाँद देखो(रमजान के महीने का ) तो रोज़ा रखना शुरू करो और जब तुम नया चाँद देखो (शव्वाल महीने का) तो रोज़ा रखना बंद कर दो, अगर असमान में बादल हो तो तीस दिनों के रोज़े रखो” – सहीह मुस्लिम – हदीस नंबर 2378

हदीस -2 

अल्लाह के पैगम्बर ने फरमाया की “चाँद देखकर रोज़े रखो और चाँद देखकर बंद करो अगर असमान में बादल हो तो पुरे संख्या (महीने ) पूरी करो करो ” –  सहीह मुस्लिम – हदीस नंबर 2379

हदीस – 3 

एक बार अल्लाह के नबी ने फरमाया की “जब तक तुम चाँद ना देख लो तब तक रमजान की शुरुआत ना करो, और तब तक करते (रोज़े) रहो जब तक नया चाँद ना देख लो”  – अल – मुवत्ता – हदीस नंबर 18.1.1

हदीस – 4 

अल्लाह के पैगम्बर, सरवर-ए-कायनात,नबी-ए-अकरम ने फरमाया की “एक महीने में 29 दिन होते हैं. रोज़े शुरू और खत्म तब तक मत करो जब तक की तुम नया चाँद ना देख लो, अगर चाँद अँधेरे में है तो यह करना(रोज़े) जारी रखो. -अल – मुवत्ता – हदीस नंबर 18.1.2

वैसे तो रमजान के चाँद को लेकर लगभग दो दर्जन हदीस है लेकिन हमने यह सिर्फ चार हदीस ही अंकित की है, सभी हदीसों में एक बात कॉमन तौर पर कही गयी गयी है की जब तक चाँद ना देख लो तब तक रमजान की शुरुआत ना करो और तब तक करते रहो जब तक शव्वाल का नया चाँद ना देख लो.

इन हदीसों से साफ़ तौर पर साबित होता है की रमजान का महिना सीधे तौर पर चाँद देखे जाने पर निर्भर करता है, अगर आसमान में चाँद है तो ज़ाहिर सी बात है की एक या दो व्यक्तियों की बजाय लाखों लोगो को नज़र आयेगा. लेकिन अगर असमान में चाँद की स्थिति क्लियर नही है तो जब तक चाँद दिखाई ना दे तब तक रमजान की शुरुआत नही होनी चाहिए.

ऐसा ही कुछ आज हुआ, जहाँ देश के कुछ हिस्सों में रोजो की शुरुआत कर दी गयी वहीँ दरगाह-ए-आलाहजरत से रमजान को लेकर कोई ऐलान नही हुआ.

ऊपर दी गयी हदीसों से एक बात और साफ़ होती है की किस देश में कब रमजान शुरू हो रहे है उससे भारत पर कोई फर्क नही पड़ता जब तक की यहाँ चाँद ना देखा जाए, चूँकि आमतौर पर भारत के मुस्लिम सऊदी अरब से तुलना करते हुए चलते है की अगर वहां चाँद दिखा तो एक दिन बाद यहाँ भी दिखेगा. हदीस से यह बात साफ़ हो जाती है की अगर आपके क्षेत्र में चाँद नज़र नही आता तो आपको अपने क्षेत्र के हिसाब से ही रमजान की शुरुआत करनी होगी.

 

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