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राजस्थान में सिर्फ अकबर और पहलू की नहीं कई मुस्लिमों की गाय के नाम पर ली गई जान

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राजस्थान के अलवर मे कथित गौरक्षा के नाम पर मारे गए रकबर उर्फ अकबर की मौत ने एक बार फिर से मुस्लिमों के जख्म हरे कर दिये है। दरअसल, गौरक्षा के नाम पर इकलोता अकबर या पहलू नहीं मारा गया। बल्कि ये लिस्ट तो काफी लंबी है।

सबसे पहला नाम है अब्दुल गफ्फार कुरैशी का, जिनकी ह्त्या 30 मई 2015 को नागौर जिले के बिरलोका गांव में पीट-पीटकर कर दी गई थी। मीट की दुकान चलाने वाले गफ्फार के काम का बहुसंख्यक धर्म का एक परिवार विरोध करता था। जिसके बाद 200 गायों के मारे जाने की अफवाह पर गफ्फार की पीट-पीट कर जान ले ली गई थी। बता दें कि 30 मई को कुम्हारी गांव के एक इलाके में लगभग 200 गायों के शवों को फेंक दिए गए थे, जिसे मवेशी शवों का निपटान करने के लिए नगर पालिका के ठेकेदार द्वारा किराए पर लिया गया था। लेकिन अफवाह फैलाई गई थी कि मुसलमानों की एक दावत के लिए 200 गायों को मारा गया। इस मामले मे तीन लोग अब जेल में हैं, जबकि सात अन्य लोग फरार हैं।

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दूसरा नाम है उमर मोहम्मद का, अलवर जिले की रामगढ़ तहसील में ही 12 नवंबर 2017 को उमर मोहम्मद की गोरक्षकों ने हत्या कर दी थी। अगले दिन उमर की लाश रेलवे ट्रैक पर मिली। उमर के परिवार की तरफ से दावा किया गया कि वह डेयरी चलाता था और उसी के लिए भरतपुर से गाय ला रहा था।

तीसरा नाम है तालिम हुसैन का,जिसकी हत्या 6 दिसंबर 2017 को अलवर में गाय के नाम पर ही हुई थी। शहर के बाहरी इलाके में कथित गोतस्करी के नाम पर तालिम को गाली मार दी गई थी। गोली मारने वाले गौरक्षक बताए गए लेकिन पुलिस ने इसे मुठभेड़ करार दिया। शहर के बाहरी इलाके में कथित गोतस्करी के नाम पर तालिम को गाली मार दी गई. पुलिस ने इसे मुठभेड़ करार दिया।

चौथा नाम है पहलू खान का, 1 अप्रैल 2017 को अलवर में गोरक्षकों की भीड़ ने 55 साल के पहलू खान की राजस्थान से गाय खरीदकर हरियाणा जाते वक्त बुरी तरह पिटाई की थी।  हमले के दो दिन बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

इसके अलावा राजसमंद जिले में मोहम्मद अफराजुल को लव जिहाद का बहाना बना कर कुल्हाड़ी से हमला कर मौत के घाट उतार दिया गया फिर उसका जिंदा जलाते हुए विडियो भी वायरल किया गया था।  बाद में पता चला कि आरोपी शंभू की राजसमंद के राजनगर की रहने वाली एक लड़की से संबंध थे और इसकी जानकारी अफराजुल को थी। जिसके चलते उसने अफराजुल को मार दिया और इस घटना को सांप्रदायिक रंग दे दिया।

27 सितंबर 2017 को जैसलमेर में 48 साल के अहमद खान की हत्या का इल्जाम गांव के पुजारी पर ही लगा। लोकगायक अहमद खान बीते एक दशक से एक मंदिर में भजन गाते थे। नवरात्रि के मौके पर पुजारी ने अहमद से एक विशेष राग गाने के लिए कहा था ताकि देवी पुजारी के शरीर में आ जाएं। इसके बाद पुजारी ने दावा किया कि अहमद खान ने सही ढंग से नहीं गाया, जिसके चलते देवी उसके शरीर में नहीं आईं और उसने अहमद खान की पिटाई कर दी।

वहीं 55 वर्षीय सीपीआई (एमएल) कार्यकर्ता जफर इस्लाम को 16 जून, 2017 को स्थानीय नगरपालिका अधिकारियों ने मारा था जब उन्होंने खुले में शौच कर रही महिलाओं की तस्वीर खींचने से रोकने की कोशिश की थी। आरोपियों में से एक शहर के सिविल बॉडी कमिश्नर अशोक जैन हैं।

अब अलवर जिले में रकबर खान की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। 28 वर्षीय युवक के साथ की गई कथित मारपीट के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और तीन अन्य लोगों की पहचान कर ली गई है। उन्होंने बताया कि रकबर खान की हत्या के सिलसिले में आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है और मारपीट के आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी।

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