मोदी सरकार ने मुख्य सचिव को वापस बुलाया तो ममता सरकार ने भेजने से किया इंकार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को प्रधान मंत्री मोदी को पत्र लिखकर कहा कि वह केंद्र के “एकतरफा आदेश” से “हैरान और स्तब्ध” हैं और मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को कार्यमुक्त नहीं करेंगी।

बनर्जी ने पत्र में लिखा, “मुझे यह स्वीकार करना चाहिए कि मैं भारत सरकार द्वारा भेजे गए एकतरफा आदेश दिनांक 28 मई, 2021 से स्तब्ध हूं, जिसमें हमें अलपन बंद्योपाध्याय, आईएएस, मुख्य सचिव, पश्चिम बंगाल को मुक्त करने के लिए कहा गया है।

ममता बनर्जी कहा कि यह एकतरफा आदेश कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरने वाला, ऐतिहासिक रूप से अभूतपूर्व तथा पूरी तरह से असंवैधानिक है। उन्होने कहा, “मुझे आशा है कि नवीनतम आदेश (मुख्य सचिव का तबादला दिल्ली करने का) और कलईकुंडा में आपके साथ हुई मेरी मुलाकात का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि संघीय सहयोग, अखिल भारतीय सेवा तथा इसके लिए बनाए गए कानूनों के वैधानिक ढांचे का आधार स्तंभ है।”

बता दें कि अलापन बंद्योपाध्याय को सुबह 10 बजे तक दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक स्थित स्टाफ और ट्रेनिंग ऑफिस में रिपोर्ट देने को कहा गया था, लेकिन वह दिल्ली नहीं गए।

ममता ने अनुरोध किया कि केंद्र ने राज्य सरकार के साथ विचार विमर्श के बाद मुख्य सचिव का कार्यकाल एक जून से अगले तीन महीने के लिए बढ़ाने जो आदेश दिया था, उसे ही प्रभावी माना जाए। केंद्र ने 24 मई को राज्य द्वारा उनके कार्यकाल को 31 अगस्त तक तीन महीने बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

शनिवार को, बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र “प्रतिशोध की राजनीति” कर रहा है और कहा कि पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हर कदम पर उनकी सरकार के लिए समस्याएं पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि क्या इस आदेश का कलाईकुंडा में समीक्षा बैठक में शामिल नहीं होने से कोई लेना-देना है।