विपक्ष की पूर्व सीएम फारुक-उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की रिहाई की मांग

नई दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता सहित देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं ने सोमवार को एक साझा बयान जारी करके जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को रिहा करने की मांग की है।

अपने बयान में इन नेताओं ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित कई अन्य राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखना भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

साझा बयान जारी करने वालों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी देवगौड़ा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद (राज्यसभा) प्रो मनोज कुमार झा, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी हैं।

इन नेताओं ने जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए), 1978 की  वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। इसी कानून के तहत जम्मू-कश्मीर के नेताओं को हिरासत में रखा गया है। संयुक्त व्यक्तव्य में कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत राज्य को मिला विशेष दर्जा हटने के बाद अब पीएसए को भी चुनौती दी जा सकती है।

इन नेताओं ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में लोकतांत्रिक असंतोष का जबरदस्त प्रशासनिक कार्रवाई कर मजाक उड़ाया जा रहा है जिसने हमारे संविधान में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के बुनियादी आदर्शों को खतरे में डाल दिया है। जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को सात महीने से अधिक समय से हिरासत में रखना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।


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