महबूबा मुफ्ती सहित तीन कश्मीरी नेताओं की हिरासत 3 महीने बढ़ाई गई

जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत तीन महीने बढ़ा दी गई है।

महबूबा मुफ्ती को उस समय हिरासत में लिया गया था, जब पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 समाप्त किया गया था। पीएसए के तहत हिरासत में ली गईं पूर्व मुख्यमंत्री को शुरू में श्रीनगर के हरि निवास अतिथि गृह में रखा गया और बाद में उन्हें चश्मा शाही इलाके में पर्यटन विभाग के एक हट में ले जाया गया।

वहां से उन्हें श्रीनगर में ट्रांसपोट यार्ड लेन स्थित एक सरकारी क्वार्टर में ले जाया गया। उसके बाद सात अप्रैल को उन्हें गुपकर रोड स्थित सरकारी अवास में शिफ्ट कर दिया गया। महबूबा के अललावा दो अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला को भी पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में दोनों को रिहा कर दिया गया।

महबूबा की बेटी इल्तिजा ने अपनी मां को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में फरवरी में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। न्यायालय ने सुनवाई के लिए 18 मार्च की तारीख तय की थी लेकिन कोरोना वायरस फैलने के चलते सुनवाई नहीं हो पाई।

 नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने मुफ्ती की नजरबंदी बढ़ाने को अविश्वसनीय रुप से क्रूर और पीछे की ओर धकेलने वाला फैसला बताया। उमर ने ट्वीट किया, ‘महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी बढ़ाने का फैसला अविश्वसनीय रूप से क्रूर और पीछे ले जाने वाला है। मुफ्ती ने ऐसा कुछ भी किया या कहा नहीं है जिससे भारत सरकार द्वारा उनके और हिरासत में लिए गए अन्य लोगों के साथ इस व्यवहार को सही ठहराया जा सके।’

उमर ने कहा, “लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य होने के दावे करने वाली सरकार द्वारा सुश्री मुफ्ती की नजरबंदी बढ़ाना इस बात का सबूत है कि मोदी जी ने जम्मू-कश्मीर को दशकों पीछे धकेल दिया है।”


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