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नौकरानी का बेटा नहीं बन सकता जज, लोकतंत्र पर धब्बा कॉलेजियम: केंद्रीय मंत्री

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राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कॉलेजियम व्यवस्था से जजों की नियुक्ति पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कॉलेजियम व्यवस्था को न्यायपालिका और लोकतंत्र पर धब्बा बताया है।

एएनआई के मुताबिक कुशवाहा ने कहा, ‘मौजूदा न्यायपालिका में जज दूसरे जजों की नियुक्ति नहीं करते, बल्कि वे अपना उत्तराधिकारी चुनते हैं. वे ऐसा क्यों करते हैं? इसे एक उत्तराधिकारी चुनने की व्यवस्था क्यों बना दिया गया है?’

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कुशवाहा ने यह भी कहा, ‘लोग आरक्षण का विरोध करते हैं, वे कहते हैं कि आरक्षण की वजह से मेरिट को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, लेकिन मैं समझता हूं कि कॉलेजियम व्यवस्था मेरिट को नज़रअंदाज़ कर रहा है. जब एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बन सकता है और मछुआरे का बेटा राष्ट्रपति बन सकता है, लेकिन क्या एक नौकरानी का बच्चा जज बन सकता है? कॉलेजियम लोकतंत्र पर धब्बा है.’

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जजों की नियुक्ति को लेकर कलीजियम व्यवस्था को बदलने के लिए न्यायिक नियुक्ति आयोग के गठन का प्रस्ताव रखा था। न्यायिक नियुक्ति आयोग ऐक्ट को संसद और देश की 20 विधानसभाओं से पारित करने के बाद सरकार ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसके खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आयोग को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया था। फिलहाल जजों की नियुक्ति एक बार फिर से कलीजियम व्यवस्था के तहत ही की जा रही है।

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