बीजेपी में शामिल होते ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ शुरू हुई जमीन घोटाले की जांच

हाल ही में कांग्रेस का साथ छोड़ बीजेपी में शामिल होकर सियासी उथल-पुथल मचाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुसीबतें बढ़ गई है। दरअसल, मध्य प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने गुरुवार को उनके खिलाफ जमीन घोटाले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, ये मामला 10 हजार करोड़ की जमीन के घोटाले का है। ज्योतिरादित्य सिंधिया पर एक ही जमीन को कई बार बेचने का आरोप है। साथ ही सरकारी जमीन को भी बेचने का आरोप है। EOW के एक अधिकारी ने बताया कि मामले में शिकायतकर्ता सुरेंद्र श्रीवास्तव ने ग्वालियर में शिकायत दी थी कि सिंधिया ने एक संपत्ति के दस्तावेज में हेरफेर कर 6,000 फुट की जमीन का हिस्सा उन्हें बेचा था।

उन्होंने आरोप लगाया कि सिंधिया ने जानबूझकर दस्तावेज में हेरफेर कर वह जमीन उन्हें बेची थी। ऐसे में इस मामले में निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। इस पर शाखा ने शिकायत के तथ्यों की फिर से जांच करने का निर्णय किया है। अधिकारी ने बताया कि पहली दफा यह शिकायत 26 मार्च 2014 में की गई थी, जिसकी जांच के बाद हमने इसे 2018 में बंद कर दिया। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने 12 मार्च को फिर से हमें आवेदन दिया है। उस आधार पर हम शिकायत के तथ्यों को फिर से जांच करेंगे।

वहीं मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने शुक्रवार को सरकार के 6 कैबिनेट मंत्रियों को हटा दिया। यह सभी मंत्री कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक थे। राज्यपाल ने यह फैसला मुख्यमंत्री कमलनाथ की सलाह के बाद लिया। जिन मंत्रियों को हटाया गया है उनमें सिंधिया की करीबी विधायक इमरती देवी, तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रद्यूमन सिंह तोमर और डॉ. प्रभुराम चौधरी शामिल हैं।


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