बिहार में महागठबंधन से अलग हुए जीतन राम मांझी, दलित वोट का होगा बड़ा नुकसान

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने महागठबंधन से अलग होने की घोषणा की है।  मांझी ने आरोप लगाया है कि आरजेडी नेता तेजस्वी यादव जिद्दी हैं और किसी की कोई बात सुनते ही नहीं हैं। ऐसे में उनके साथ रहकर काम करना मुश्किल है।

जीतन राम मांझी के नेतृत्व में पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया। पार्टी के प्रधान महासचिव संतोष मांझी ने कहा कि पार्टी ने अपने आगे का रास्ता खुला रखा है। संतोष मांझी ने कहा कि हमारा रास्ता राष्ट्रीय जनता दल से है। राजद जिस गठबंधन में होगा हम उस गठबंधन का हिस्सा नहीं होंगे।

उन्होने बताया कि हम लोग लगातार मांग कर रहे थे कि महागठबंधन को सही तरीके से चलाने के लिए कोआर्डिनेशन कमेटी बनाई जाए मगर तेजस्वी यादव तानाशाह की तरह महागठबंधन पर अपने फैसले थोप रहे थे।” सुमन ने कहा कि महागठबंधन को लेकर तेजस्वी यादव एक तरफा फैसले ले रहे थे और छोटे दलों को तवज्जो नहीं दी जा रही थी। इस बात से उनके पिता जीतन राम माझी काफी आहत हैं।

बता दें कि बिहार में अनुसूचित जाति के लिए बिहार विधानसभा में कुल 38 सीटें आरक्षित हैं। 2015 में आरजेडी ने सबसे ज्यादा 14 दलित सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि, जेडीयू को 10, कांग्रेस को 5, बीजेपी को 5 और बाकी चार सीटें अन्य को मिली थी। इसमें 13 सीटें रविदास समुदाय के नेता जीते थे जबकि 11 पर पासवान समुदाय से आने वाले नेताओं ने कब्जा जमाया था।

वहीं हम प्रवक्ता दानिश रिजवान ने बताया कि किसी अन्य गठबंधन में जाने के संबंध में अगले दो-तीन दिनों में ही निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल अभी यह तय नहीं किया गया है कि आखिर मांझी कहां जाऐंगे। वहीं चर्चा है कि मांझी फिर से एनडीए में घर वापसी कर सकते हैं। उनकी जेडीयू के नेताओं से इस मामले में बातचीत भी हो चुकी है।