स्वतंत्रता दिवस पर सोनिया गांधी ने मोदी से पूछा – क्या देश में अभिव्यक्ति की आजादी बची है?

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने संदेश में मोदी सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या इस देश में अब लिखने, बोलने और सवाल पूछने, मतभेद जताने, विचार रखने की आजादी रह गई है?

सोनिया गांधी ने कहा, “हमने बीते 74 वर्षों की स्वाधीनता में अपने प्रजातांत्रिक मूल्यों को समय समय पर परीक्षा की कसौटी पर परखा है और उसे निरन्तर परिपक्व किया है। आज ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार प्रजातांत्रिक व्यवस्था, संविधान मूल्यों व स्थापित परम्पराओं के विपरीत खड़ी है। भारतीय लोकतंत्र के लिए भी ये परीक्षा की घड़ी है।”

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “आज हर देशवासी को अंतरात्मा में झांक कर यह सोचने की आवश्यकता है कि आजादी के क्या मायने हैं? क्या आज देश में लिखने, बोलने, सवाल पूछने, असहमत होने, विचार रखने, जवाबदेही मांगने की आजादी है?” उन्होने कहा, दुनिया भर में भारत की ख्याति न सिर्फ प्रजातांत्रिक मूल्यों और विभिन्न भाषा, धर्म, संप्रदाय के बहुलतावाद की वजह से है, बल्कि भारत प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना एकजुटता के साथ करने के लिए भी जाना जाता है।

उनके मुताबिक, ‘‘आज जब समूचा विश्व कोरोना महामारी की महाविभीषिका से जूझ रहा है, तब भारत को एकजुट होकर इस महामारी को परास्त करने के प्रतिमान स्थापित करने होंगे और मैं पूरे आत्मविश्वास से कह सकती हूं कि हम सब मिलकर इस महामारी व गंभीर आर्थिक संकट की दशा से बाहर आ जाएंगे।”

सोनिया ने पूर्वी लद्दाख में कुछ सप्ताह पहले शहीद हुए जवानों को याद करते हुए कहा, ‘‘आज कर्नल संतोष बाबू समेत हमारे 20 जवानों की गलवान घाटी में वीरगति को भी साठ दिन बीत चुके हैं। मैं उनको भी याद कर उनकी वीरता को नमन करती हूं व सरकार से आग्रह करती हूं की उनकी वीरता का स्मरण करे व उचित सम्मान दे।”


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