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राहुल की ताजपोशी, सोनिया गांधी ने अपने आख़िरी सम्बोधन में इंदीरा और राजीव गांधी के बलिदान को किया याद

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नई दिल्ली । आज देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिल गया। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अध्यक्ष के तौर पर पार्टी की कमान सम्भाल ली। इस दौरान राहुल को सर्टिफ़िकेट देकर उन्हें अधिकारिक तौर पर अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। पार्टी की कमान सम्भालने के बाद राहुल गांधी ने अपने पहले सम्बोधन में प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर करारा हमला बोला।

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उन्होंने कहा कि कांग्रेस भारत को 21वी सदी में लेकर गयी जबकि भाजपा हमें वापिस मध्यकाल में ले जा रहे है। भाजपा पूरे देश में आग लगाती है तो हम आग बुझाते है। भाजपा आवाज़ को कुचल देती है जबकि हम बोलने का मौक़ा देते है। इसलिए भाजपा को हमें रोकना होगा। यह केवल कांग्रेस के कार्यकर्ता ही कर सकते है। राहुल ने कांग्रेस को ग्रँड ओल्ड एवं यंग पार्टी बनाने का वादा किया।

राहुल की ताजपोशी के समय वहाँ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उनकी बहन प्रियंका गांधी और कांग्रेस के अन्य दिग्गज नेता मौजूद रहे। इस मौक़े पर बोलते हुए सोनिया गांधी काफ़ी भावुक नज़र आयी। उन्होंने राहुल गांधी की तारीफ़ करते हुए कहा की राहुल मेरा बेटा है मैं बड़ाई तो नहीं करूंगी लेकिन बचपन से ही हालातों ने उन्हें मजबूत और सहनशील बनाया है।

सोनिया ने आगे कहा की मैं आज इस जिम्मेदारी को छोड़ते हुए अपने कार्यकर्ताओं और देश वासियों से मिले प्यार के लिए धन्यवाद देती हूं। इस यात्रा में आप हमारे साथी रहे हैं। मै आपको धन्यवाद देती हूं। आपसे जो कुछ सीखा और समझा उसकी कोई तुलना नहीं हो सकती। मेरे पार्टी अध्यक्ष बनने के समय कांग्रेस के पास केवल 3 राज्य थे लेकिन आपके सहयोग से केंद्र में भी हमारी सरकार बनी।

अपनी सास इंदिरा गांधी और पति राजीव गांधी के बलिदान का ज़िक्र करते हुए कहा की इंदिरा गांधी की हत्या के 7 साल के बाद मेरे पति की भी हत्या की गई। इसके बाद मुझे पार्टी के आम कार्यकर्ताओं की पुकार सुननी पड़ी। मुझे लगा कि इस जिम्मेदारी को नकारने से इंदिरा जी और राजीव जी का बलिदान व्यर्थ जाएगा। इसीलिए अपने कर्तव्य को समझते हुए मैं राजनीति में आई। सोनिया ने इंदिरा की तरफ़ करते हुए कहा की उन्होंने मुझे हमेशा अपनी बेटी की तरह समझा।

सोनिया ने कहा की मैं एक क्रांतिकारी परिवार में आयी। इस परिवार ने देश के लिए धन, दौलत और अपनी जान भी बलिदान कर दी। इंदिरा जी ने मुझे बेटी की तरह स्वीकार किया। जब इंदिरा जी की हत्या हुई तो मुझे लगा जैसे मेरी मां छीनी गई हों। इस हादसे ने मेरे जीवन को बदल डाला। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने ख़ुशी में कई बार पठाखे जलाए तो सोनिया को अपना सम्बोधन कई बार रोकना पड़ा।

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