7 महीने बाद रिहा हुए फारूक अब्दुल्ला, कहा – आज मेरे पास बोलने के लिए शब्द नहीं

श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। वह बीते 7 महीने से घर पर ही नजरबंद थे। उन पर सरकार ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत कार्रवाई की थी।

उन्होंने रिहा होने के बाद कहा कि मैं हमारी आजाद के लिए आवाज उठाने वाले लोगों का आभारी हूं। सभी नेताओं की रिहाई के बाद ही यह आजादी पूरी होगी। मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार अब सभी को रिहा करेगी। अब मैं संसद में जाऊंगा और लोगों की आवाज उठाऊंगा।

बता दें कि फारूक अब्दुल्ला भले ही रिहा हो गए हो, लेकिन उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत कई नेता फिलहाल नजरबंद हैं। पत्रकारों से बातीचीत करने के दौरान फारूक का परिवार भी खड़ा नजर आया।

9 मार्च को आठ विपक्षी पार्टियों ने केंद्र से मांग की थी कि जम्मू-कश्मीर के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को तत्काल रिहा किया जाए। विपक्षी नेताओं ने कहा कि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं कि इन लोगों की गतिविधियों ने राष्ट्रीय हितों को खतरे में डाला हो।

राकांपा अध्यक्ष शरद पवार, तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी, जेडीएस नेता एचडी देवेगौड़ा, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी राजा, राजद नेता मनोज झा, पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने बयान जारी कर पूर्व मुख्यमंत्रियों को रिहा करने की मांग की।

मोदी सरकार द्वारा पिछले वर्ष पांच अगस्त को जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को हटा दिया गया था, जिसके बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया। इसी समय से एहतियात के तौर पर जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों नेशनल कॉन्फ्रेंस से फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से महबूबा मुफ्ती सहित दर्जनों राजनेताओं को नजरबंद कर दिया गया था।


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