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दिग्विजय सिंह ने किया प्रणब का बचाव – ‘अगर RSS ने मुझे बुलाया होता तो मैं भी जाता’

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नागपूर स्थित आरएसएस के कार्यालय मे जाकर विवादो मे आए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बचाव मे अब खुद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह सामने आए है। उन्होंने कहा, ‘अगर आरएसएस ने मुझे न्योता दिया होता तो मैं भी जाता।’

ईकनॉमिक टाइम्स को दिये इंटरव्यू मे में दिग्विजय ने कहा, ‘अगर आरएसएस ने मुझे बुलाया होता तो मैं भी जाता। आरएसएस सरसंघचालक के साथ मंच साझा करने में क्या बुराई है? मैं गया होता और उनको आईना दिखाता और अपनी विचारधारा को सबके सामने रखता।’

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हिंदू आतंकवाद वाले बयान पर दिग्‍विजय सिंह ने कहा, ‘पहले मैं बता दूं कि हिंदुत्‍व शब्‍द सावरकर जी ने इजाद किया। इसका धर्म से लेना देना नहीं है। मैं एक सात्‍विक हिंदू हूं। सनातन धर्मी हूं। मैं खुद हिंदू हूं, मैं कैसे कह सकता हूं कि हिंदू आतंकवाद? कोई धर्म आतंकवाद का पक्षधर नहीं हो सकता। कोई धर्म हिंसा के लिए प्रेरित नहीं करता। पहली बात तो हमारा धर्म सनातन धर्म है हिंदू धर्म नहीं। हमारे वेद पुराणों में भी सनातन धर्म का जिक्र है। सनातन जिसका अंत न हो।’

दिग्‍विजय ने कहा, ‘गुरु गोलवलकर जी ने राम को अवतार नहीं माना है, उन्‍होंने आदर्श माना है. ये आर्य समाजी है, मैं सनातनी हूं। मैं तो इस बात का भी विरोध करता हूं कि ये लोग नारा जय श्री राम का क्‍यों लगाते हैं, सीता जी को क्‍यों भूल जाते हैं। सिया राम का नारा लगाएं।  ये लोग धार्मिक नहीं है. ये धर्मान्धता फैलाते हैं। और धर्मान्‍धता से नफरत फैलती है। मुझसे बड़ा धार्मिक व्‍यक्‍ति बीजेपी और संघ में नहीं मिलेगा।’

संघी आतंकवाद जैसे शब्‍द को लेकर दिग्‍विजय सिंह ने कहा, ‘संघ हिंदुओं का प्रतिनिधित्‍व नहीं करता है। मैं हिंदू हूं। इस देश के 85 प्रतिशत हिंदू किसके हैं। संघ कोई रजिस्‍टर्ड संस्‍था नहीं है। इसकी सदस्‍यता ही नहीं होती। इसके बारे में चिंता क्‍यों कर रहे हैं।

दिग्‍विजय सिंह ने ‘संघी आतंकवाद’ कहने पर कहा कि ये लोग खुद को आरएसएस का प्रचारक कहते हैं। आरएसएस का प्रचारक अजमेर दरगाह केस में दोषी पाया गया है। सुनील जोशी जो की संघ का प्रचारक है जो की बॉम्‍ब ब्‍लास्‍ट में आरोपी था उसकी हत्‍या किसने की। संघ के लोगों ने हत्‍या की। उनको सजा भी हुई है। ये सब लोग कौन है। ये लोग बीजेपी के फुट सोल्‍जर हैं, आरएसएस के फुट सोल्‍जर हैं। ये एक विचार है। वो विचार जिसने महात्‍मा गांधी की हत्‍या की, जिसने कलबुर्गी की हत्‍या की, जिसने गौरी लंकेश की हत्‍या की। ये विचारधारा हिंसा के लिए प्रेरित करती है।’

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