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कुमारस्वामी ने बताया – समर्थन पर गुलाम नबी आजाद ने तुरंत मांगा था हां या ना में जवाब

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कर्नाटक के भावी मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की वह बात एकदम सच साबित हुई जिसमे चुनाव से पहले दावा किया था कि वह किंगमेकर नहीं बल्कि किंग बनेंगे. इस बारें में उन्होंने अब अलग ही जवाब दिया.

कुमारस्‍वामी ने कहा कि मैं जनादेश से कर्नाटक का किंग बनना चाहता था, इस तरह से नहीं. पहली बार 2006 में राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से मैं पहली बार मुख्‍यमंत्री बना था. अब इस वक्‍त मेरी परिस्थिति फिर वैसी ही है. जनता के आशीर्वाद से ऐसा नहीं हो रहा है. कर्नाटक के लोग ये क्‍यों नहीं सोचते कि मैं कैसा महसूस करता हूं? वे लोग मुझ पर भरोसा क्‍यों नहीं करते? मैं राजनेता नहीं हूं…मैं एक भावुक व्‍यक्ति हूं. मैं लोगों की परेशानियां और अपेक्षाएं समझता हूं. लोगों ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही देख लिया है…मैंने सोचा था कि लोग मुझे अबकी बार चांस देंगे लेकिन मुझे अबकी पिछली बार की तुलना में भी कम सीटें मिलीं.

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इकॉनोमिक टाइम्स से बातचीत में कुमारस्वामी ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह मुख्यमंत्री बनेंगे लेकिन चुनावी नतीजों के दिन कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद का फोन आया और कहा कि उनकी पार्टी के नेताओं ने सर्वसम्मति से फैसला ले लिया है और उन्हें पांच साल के लिए समर्थन देने का फैसला किया है। कुमारस्वामी ने कहा कि जब हमने इसके लिए समय मांगा तो आजाद ने कहा कि तुरंत फैसला लीजिए और हां या न कीजिए.

कुमारस्वामी ने बताया कि इसके बाद वो अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पास गए और उन्हें दोनों विकल्प के बारे में बताया साथ ही उन्होंने क्या तय किया है, इस बारे में भी बताया. कुमारस्वामी ने कहा कि साल 2006 में जब उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी तब पूरे देश में इस बात को लेकर काफी हो-हल्ला हुआ था. साथ ही पिता-पुत्र के बीच सीएम को लेकर सियासी नाटक करने के आरोप लगे थे.

कुमारस्वामी ने कहा कि तब उन पर अपने पिता के माथे पर एक काला धब्बा लगाने का आरोप लगा था लेकिन अब उस धब्बे को धोने का वक्त आ गया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी से दोस्ती नहीं कर उन्होंने देश को संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी और परिवार आज भी उसी तरह समाजवादी है जैसा उनके पिता के समय में था.

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