अपने चाणक्य की राज्यसभा सीट बचाने में नाकाम हो रही कांग्रेस, BJP के पास जाना तय

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल का निधन हो गया है। कोरोना वायरस से पीड़ित होने के बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और वह इस दुनिया से चले गए। उनके निधन से खाली हुई राज्यसभा सीट को भी कांग्रेस बचाने में नाकाम साबित हो रही है। ये सीट अब BJP के खाते में जाएगी।

बता दें कि इस सीट को लेकर 2017 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और भाजपा में कांटेदार जंग हुई थी। इस चुनाव में सीधा मुकाबला कांग्रेस के अहमद पटेल और बीजेपी के अमित शाह के बीच में था, जो पूरी रात तक चलता रहा लेकिन अंत में अहमद पटेल को जीत हासिल हुई थी।

अब गुजरात के सियासी समीकरण को ध्यान में रखकर देखा जाए तो राज्य में बीजेपी के 111 विधायक हैं, वहीं कांग्रेस के 65 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 50 फीसदी वोट या 88 वोट जरूरी हैं। ऐसे में बीजेपी इस सीट को आसानी से जीतती हुई प्रतीत हो रही है।

बता दें कि अहमद पटेल को कांग्रेस पार्टी का चाणक्य माना जाता रहा है। सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और संभवतः प्रणब मुखर्जी के बाद यूपीए के 2004 से 2014 के शासनकाल में अहमद पटेल सबसे ताक़तवर नेता थे। पार्टी के कोषाध्यक्ष के तौर पर, उनकी ज़िम्मेदारी पार्टी के लिए ना केवल फ़ंड जुटाने की थी।

अहमद पटेल तीन बार लोकसभा सांसद और चार बार राज्यसभा सांसद रहे। उन्होंने अपना पहला चुनाव वर्ष 1977 में भरूच लोकसभा सीट से लड़ा था। इस चुनावी मुकाबले में अहमद पटेल 62 हजार 879 मतों से जीते थे। अहमद पटेल 1977 में चुनाव जीतकर सबसे युवा सांसद बने थे। उस दौरान उनकी उम्र महज 26 साल थी।