मोदी सरकार पिछले दरवाजे से लाई सीएए, फासी’वादी स्वभाव हुआ उजागर: लेफ्ट

पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को नागरिकता देने के लिए केंद्र के उठाए कदम की आलोचना करते हुए शनिवार को वाम दलों ने कहा कि इससे मोदी सरकार के “फा’सीवादी चरित्र” का पता चलता है और यह सीएए-2019 को “बैक डोर एंट्री” देने का एक तरीका है।

केंद्र ने शुक्रवार को एक गजट अधिसूचना जारी कर गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के 13 जिलों के अधिकारियों को पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों के नागरिकता आवेदनों को स्वीकार करने, सत्यापित करने और मंजूरी देने के लिए मौजूदा नियमों के तहत शक्तियां प्रदान कीं।

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया, ‘‘सीएए-2019 के नियम तय नहीं हुए हैं, इसके बावजूद केंद्र सरकार ने इसे लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी। सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अब तक सुनवाई नहीं हुई है। आशा करता हूं कि उच्चतम न्यायालय त्वरित संज्ञान लेगा और सीएए को पिछले दरवाजे से लागू करने पर रोक लगाएगा।’’

भाकपा महासचिव डी राजा ने आरोप लगाया कि यह कदम वर्तमान सरकार के “फा’सीवादी चरित्र को पूरी तरह से उजागर करता है”। उन्होंने कहा कि कोरो’नोवा’यरस महामारी के कारण आंदोलनकारियों के शांत होने से पहले सीएए 2019 के खिलाफ भारी विरोध प्रद’र्शन हुए, जबकि पहले कुछ विरोधों को “बेरहमी से कुचल दिया गया”।

“यह (नवीनतम नागरिकता कदम) सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है यदि वह ऐसे समय में अपने राजनीतिक एजेंडे का पीछा करती है जब एक महामारी के कारण हर दिन हजारों लोग म’र रहे हैं। यह सरकार को असंवेद’नशील, जनविरो’धी और लोकतंत्र विरो’धी के रूप में उजागर करता है।

भाकपा-माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने सवाल किया कि जब सीएए के नियम अभी भी लागू नहीं हैं तो ऐसा आदेश कैसे पारित किया जा सकता है। भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने सवाल किया कि जब सीएए के नियम तैयार नहीं हुए तो फिर इस तरह का आदेश कैसे पारित हो गया?