कोटा से छात्रों की वापसी पर बोले नीतीश – अमीरों के लिए भेजी बस, गरीब-मजदूरों के लिए नहीं’

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राजस्थान के कोटा में फंसे साढ़े 7 हजार कोचिंग छात्रों को निकालने के लिए 252 बसें कोटा भेजी। जिस पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) ने सवाल उठाया है। उन्होने कहा कि अमीरों के लिए बस भेज दी गई। लेकिन गरीब और मजदूरों के लिए नहीं।

सीएम नीतीश कुमार ने कहा, ‘कोटा में पढ़ने वाले छात्र संपन्न परिवार से आते हैं। अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को साथ रहते हैं, फिर उन्हें क्या दिक्कत है। जो गरीब अपने परिवार से दूर बिहार के बाहर हैं फिर तो उन्हें भी बुलाना चाहिए। लॉकडाउन के बीच मे किसी को बुलाना नाइंसाफी है। इसी तरह मार्च के अंत में भी मजदूरों को दिल्ली से रवाना कर लॉकडाउन को को तोड़ा गया था।’

बिहार सीएम (Nitish kumar) ने साफ शब्दों में कहा कि यह लॉकडाउन का माखौल उड़ाने वाला फैसला है। बस भेजने का फैसला पूरी तरह से लॉकडान (Coronavirus lockdown) के सिद्धांतों को धता बताने वाला है। साथ ही सीएम नीतीश ने राजस्थान सरकार से मांग की है कि वह बसों का परमिट वापस ले। कोटा में जो छात्र जहां हैं उनकी सुरक्षा वहीं की जाए।

इस मसले पर बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने राजस्थान सरकार को पत्र भेजा है, जिसमें कहा है, ‘कोटा ये यूपी के छात्रों को निकलने देने का फैसला भानुमती का पिटारा खोलने जैसा है। यदि आप छात्रों को कोटा से निकलने की अनुमति देते हैं, तो आप किस आधार पर प्रवासी मजदूरों को वहां रुकने के लिए कह सकते हैं। इसलिए राजस्थान सरकार को चाहिए कि वह बसों को जारी की गई विशेष परमिट रद्द कर दे।’

बता दें कि इस दौरान लॉकडाउन की धज्जियां उड़ा के रख दी गई। सोशल डिस्टेन्सिंग का कोई पालन ही नहीं हुआ। दरअसल, कोटा बस स्टैंड पर एक साथ दर्जन भर से ज्यादा बसें खड़ी थी। हर बस में बारी-बारी से 30 छात्रों को बिठाना था, लेकिन बस पकड़ने के लिए छात्रों की भारी भीड़ जुट गई। इस दौरान ना कोरोना संक्रमण का डर था, ना चेहरे पर मास्क, ना ही एक दूसरे के बीच कोई फासला था।


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