इस्लामोफोबिया के आरोपो पर बोले थरूर – भारत में जमीनी हकीकत बदलने की जरूरत

देश में मुसलमानों के खिलाफ वारदातों और बयानों के कारण अरब और मुस्लिम देशों की और से भारत में इस्लामोफोबिया के लगाए जा रहे आरोपो पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा है कि भारत में जमीनी हकीकत को बदलने की जरूरत है।

उन्होने शुक्रवार को कहा कि मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयानों और घटनाओं से विदेशों में नकारात्मक प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है तथा इस पर ‘नुकसान की भरपाई’ के बजाय घरेलू हकीकत को बदलना अधिक महत्वपूर्ण होगा। उन्होने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अपने कुछ उच्च पदासीन व्यक्तियों समेत ‘सबसे उग्र समर्थकों’ की ओर से किए जाने वाले गलत व्यवहार और बयानों पर अंकुश लगाने में ‘शर्मनाक ढंग से’ विफल रही है।

लोकसभा सदस्य थरूर के मुताबिक, सरकार जो कहती है वो मायने नहीं रखता, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि वह खुद क्या करती है, और दूसरों को क्या करने देती है… इसी से उसके बारे में धारणा बनती है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के 2014 में दिए गए कथित बयान का हवाला देते हुए कहा, ‘‘हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ‘रामजादे….’ वाला बयान एक मंत्री ने दिया था। हाल ही में उत्तर प्रदेश में भाजपा के एक विधायक की कथित टिप्पणी आई जिसमें उन्होंने लोगों से मुस्लिम सब्जी वाले के पास से सब्जी नहीं खरीदने के लिए कहा।’’

कांग्रेस नेता यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि खुद प्रधानमंत्री के कैंप से इस्लामोफोबिया का प्रचार हुआ। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘अब कोई खबर पल में दुनियाभर में फैल जाती है। ऐसे में मुस्लिम जब तक देश से बाहर है तब तक तो प्यार, लेकिन देश के अंदर मुसलमानों के अपमान की प्रवृत्ति खतरनाक है।’

थरूर का यह बयान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजकुमारी, कुवैत सरकार और विभिन्न अरब देशों की नामी-गिरामी हस्तियों की ओर से आई कड़ी प्रतिक्रिया पर आया है। ऑर्गनाजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (OIC) ने भी भारत पर इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

केरल के तिरुअनंतपुरम से कांग्रेस सांसद ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुस्लिम देशों की प्रतिक्रिया अप्रत्याशित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के डैमेज कंट्रोल के प्रयासों का स्वागत करता हूं, लेकिन दूसरे देशों को भरोसे में रखने के लिए बार-बार बयान जारी करने से बेहतर है कि हम देश के अंदर की जमीनी हकीकत में बदलाव करें।’


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