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खिड़की मस्जिद पर महाराणा प्रताप के किले का दावा, अल्पसंख्यक आयोग ने ASI से मांगा जवाब

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दिल्ली सल्तनत के बादशाह फिरोज शाह तुगलक के शासन काल में बनी ऐतिहासिक खिड़की मस्जिद को अब राजपूत राजा महाराणा प्रताप का किला बताने की कोशिश की जा रही है। जिस पर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) से जवाब तलब किया है।

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) ने ASI से सवाल किया कि मस्जिद को लेकर किए जा रहे दावों को खारिज करने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं? डीएमसी के अध्यक्ष जफरूल इस्लाम खान ने स्वत: संज्ञान पर नोटिस जारी किया है।

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खान के मुताबिक, “आयोग ने विभाग से पूछा है कि मस्जिद को महाराणा प्रताप का किला बताने वाले दावों को खारिज करने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं?” आयोग ने इसके अलावा यह भी पूछा है कि स्मारक के साइन बोर्ड से ‘मस्जिद’ शब्द न मिटाया जा सके, इसके लिए विभाग ने क्या किया है?

डीएमसी अध्यक्ष ने कहा, “लगातार ऐसी खबरें प्रकाशित हो रही हैं, जिनके मुताबिक मस्जिद शब्द को एएसआई के साइनबोर्ड से बार-बार मिटाया जा रहा है। साथ ही कुछ स्थानीय लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि तुलगक के दौर का यह स्मारक दरअसल महाराणा प्रताप का किला है।’’

उन्होंने बताया कि अब तक एएसआई ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है। बता दें कि इस मस्जिद का निर्माण फिरोज शाह तुगलक के प्रधानमंत्री मलिक मकबूल ने कराया था। 1915 के भारत के राजपत्र के मुताबिक, खिड़की मस्जिद को एएसआई ने अधिसूचित किया है।

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