दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष बोले – पुलिस लिखित में दे तो सहयोग के लिए तैयार

नई दिल्ली: हाल ही में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ज़फरुल इस्लाम के खिलाफ कुवैत को लेकर किए गए ट्वीट के मामले में देशद्रोह (Sedition) और धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देने का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उन्हे गिरफ्तार करने पहुंची थी। लेकिन विरोध के बाद खाली हाथ लौटना पड़ा।दरअसल, दिल्ली पुलिस बिना नोटिस के ही पहुंची थी।

इस मामले में अब डॉ. जफरुल इस्लाम खान का कहना है कि वह पुलिस के साथ सहयोग को तैयार हैं लेकिन इससे पहले वह चाहते हैं कि इससे पहले दिल्ली पुलिस उन्हें लिखित में देकर जांच में सहयोग के लिए कहे। जफरुल ने आईएएनएस से बात करते हुए गुरुवार को पुलिस के साथ जांच में सहयोग को लेकर अपना पक्ष साफ किया।

जफरुल ने कहा, “मुझे स्पेशल सेल ने शुक्रवार को 12. 00 बजे बुलाया है और मुझसे मेरा लैपटॉप और फोन भी लाने को कहा है, लेकिन मैं नही जाऊंगा क्योंकि मैंने उनसे कहा है कि मुझे लिखित में दीजिए तो मैं सहयोग करने को तैयार हूं लेकिन स्पेशल सेल लिखित में नही दे रही है।”

वहीं जफरुल इस्लाम की वकील वृंदा ग्रोवर ने कल शाम एक बयान में कहा कि जफरुल इस्लाम 72 वर्षीय सीनियर सिटीजन हैं और उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित हैं, जिससे उन पर कोरोना वायरस का ज्यादा खतरा है। ऐसे में वह घर से बाहर नहीं निकल सकते। कानून के मुताबिक भी वह पुलिस स्टेशन नहीं जा सकते।

बता दें किजफरुल इस्लाम ने ट्विटर पर लिखा था कि  ”अगर भारत के मुसलमानों ने अरब और दुनिया के मुसलमानों से कट्टर/असहिष्णु लोगों के हेट कैंपेन, लिंचिंग और दंगों की शिकायत कर दी तो ज़लज़ला आ जाएगा।” जफरुल इस्लाम खान ने ज़ाकिर नाइक का भी समर्थन किया था।

पुलिस ने वसंत कुंज निवासी एक व्यक्ति की शिकायत मिलने के बाद खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह) और 153ए (धर्म, नस्ल और जन्म स्थान के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता भड़काने) के तहत 30 अप्रैल को एक प्राथमिकी दर्ज की।


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