कुवैत मामले में बोले जफरुल इस्लाम खान – बयान पर अब भी कायम, ट्वीट नहीं किया डिलीट

नई दिल्ली: दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ज़फरुल इस्लाम के खिलाफ कुवैत को लेकर किए गए ट्वीट के मामले में देशद्रोह (Sedition) और धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देने का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले को लेकर अब उन्होने अपनी चुप्पी तोड़ी है।

उन्होंने कहा है कि ”मीडिया के एक हिस्से ने यह गलत तरीके से बताया कि मैंने ट्वीट के लिए माफी मांगी है और उसे हटा दिया है। मैंने ट्वीट के लिए माफी नहीं मांगी है और उसे डिलीट नहीं किया है।” दरअसल, मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि उन्होने अपने बयान को लेकर न केवल माफी मांगी बल्कि ट्वीट भी डिलीट कर दिया।

बता दें कि इसके पहले जफरुल इस्लाम ने ट्विटर पर लिखा था कि  ”अगर भारत के मुसलमानों ने अरब और दुनिया के मुसलमानों से कट्टर/असहिष्णु लोगों के हेट कैंपेन, लिंचिंग और दंगों की शिकायत कर दी तो ज़लज़ला आ जाएगा।” जफरुल इस्लाम खान ने ज़ाकिर नाइक का भी समर्थन किया था।

उक्त बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने के बाद ज़फरुल इस्लाम ने शुक्रवार को कहा था कि अगर मेरे वक्तव्य से किसी को ठेंस पहुंची हो तो मैं इसके लिए माफी मांगता हूं। हमारा देश मौजूदा समय हेल्थ इमरजेंसी से गुजर रहा है और ऐसे हालात में मेरे उस ट्वीट का गलत अर्थ निकाला गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले महीने की 28 तारीख को मैंने एक ट्वीट किया था जिसमें कुवैत के उत्तर पूर्वी जिलों में भारतीय मुसलमानों के उत्पीड़न के संदर्भ में ट्वीट किया था, मेरे इस ट्वीट से जिन लोगों को पीड़ा हुई उनसे मैं माफी मांगता हूं मेरा कभी ऐसा उद्देश्य नहीं था कि मैं किसी को हर्ट करने के लिए ऐसा ट्वीट करूं। मैंने यह महसूस किया कि मौजूदा समय में चल हमारे देश में चल रही हेल्थ इमरजेंसी के दौरान मैं उन सभी से मांफी मांगता हूं जिनकी भावनाएं मेरे उस ट्वीट को लेकर आहत हुईं थीं।

उन्होंने आगे बताया कि इसके अलावा एक ट्वीट की सीमा जो बहुत कम होती है जबकि उसका मतलब काफी बड़ा हो जाता है भी इस पूरी बयानबाजी की वजह बन गया था। यह बातचीत एक प्लेन भाषा में नहीं थी। इसमें बहुत सी बातों को जोड़कर मुख्य बात को छोड़ दिया गया था, मेरा यह उद्देश्य नहीं था और न ही इस ट्वीट का ये मतलब था जो कि निकाला गया।

उन्होंने आगे बताया कि इसके अलावा एक ट्वीट की सीमा जो बहुत कम होती है जबकि उसका मतलब काफी बड़ा हो जाता है भी इस पूरी बयानबाजी की वजह बन गया था। यह बातचीत एक प्लेन भाषा में नहीं थी। इसमें बहुत सी बातों को जोड़कर मुख्य बात को छोड़ दिया गया था, मेरा यह उद्देश्य नहीं था और न ही इस ट्वीट का ये मतलब था जो कि निकाला गया।


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