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CAA विरोध: गिरफ्तार एक्टिविस्ट से पुलिस ने पूछा – हिंदू होते हुए तुम्हारी मुस्लिमों से दोस्ती क्यों?

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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर लड़ने वाले रॉबिन वर्मा को लखनऊ की एक अदालत ने जमानत दे दी है। उन्हें अंग्रेजी अखबार ‘दी हिंदू’ के पत्रकार उमर राशिद के साथ 20 दिसंबर को गिरफ्तार किया था।

जमानत मिलने के बाद एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया है कि जब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था तब उनसे पूछा था कि ‘तुम हिंदू हो…तुम्हारे दोस्त मुसलमान क्यों हैं?’…इतना ही नहीं उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनकी बेटी और पत्नी के लिए गंदी बातों का इस्तेमाल भी किया।

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रॉबिन वर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिसकर्मियों द्वारा शारीरिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित किया गया। इसके साथ ही पुलिस ने उन्हें चेतावनी भी दी कि उनकी पत्नी और नाबालिग बेटी के साथ भी ऐसा ही किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पुलिस वालों ने उनका मोबाइल फोन ले लिया और उसकी गहराई से जांच के दौरान फोन और व्हाट्सएप सूची में कई मुस्लिमों के नंबर मिलने पर उन्हें फटकार लगाई।

रॉबिन वर्मा के अनुसार पुलिस ने उनसे पूछा, “आप उनके (मुस्लिमों) साथ कहां जाते हैं और आपके इतने सारे मुसलमान दोस्त क्यों हैं?” उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उनकी पत्नी के लिए भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। वर्मा ने कहा कि हिरासत में बिना वर्दी पहने कई पुलिसकर्मियों ने उन्हें बेरहमी से पी’टा। उन्होंने बताया कि थाने में हिरासत के दौरान उन्हें कंबल, भोजन और पानी तक से भी वंचित रखा गया।

अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से इनकार करते हुए वर्मा ने कहा कि वह किसी भी हिंसा का हिस्सा नहीं थे, बल्कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जताया था और वहां से चले गए थे।बता दें कि पुलिस ने रॉबिन वर्मा को 20 दिसंबर को एक राष्ट्रीय अखबार के पत्रकार के साथ हिरासत में लिया था, जब वे हजरतगंज इलाके में एक रेस्तरां में भोजन कर रहे थे। इसके बाद उन्हें हजरतगंज पुलिस थाने और फिर सुल्तानगंज स्टेशन ले जाया गया, जहां उन्हें कथित तौर पर थप्प’ड़ और घूं’से मारे गए और उन्हें चमड़े की बेल्ट से भी पी’टा गया।

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