सीएए विरोध: देवबंद पर भड़की प्रदर्शनकारी महिलाएं, उठाए ज़िम्मेदारी, हम घर चले जाएंगे

दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर सहारनपुर के देवबंद ईदगाह मैदान में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) के खिलाफ महिलाओं का धरना जारी है। लेकिन इस धरने को समाप्त कराने के लिए प्रशासन जुटा हुआ है।

धरने पर बैठी महिलाओं  ने इस धरने को ‘देवबंद सत्याग्रह’ नाम दिया, साथ ही कहा कि शाहीन बाग प्रदर्शन उनका ‘आइकन’ है। जिला प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को एक नोटिस भेजा है, जिसमें उन पर देशद्रोही व्यवहार को प्रोत्साहित करने और शांति को बाधित करने का आरोप लगाया।

इससे पहले प्रशासन की तरफ से नगर के पूर्व विधायक माविया अली, चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी समेत कुछ अन्य लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल महिलाओं से धरने को खत्म कराने के लिए धरनास्थल पर पहुंचा था। लेकिन इन सभी को बेहद ही अपमानित होना पड़ा।

महिलाओं ने इन लोगों के ऊपर चूड़ियां फेंकते हुए गो-बैक के नारे लगाए। जिसके चलते सदस्यों का लौटना पड़ा। प्रदर्शनकारी महिलाओं को समझाने गए में लोगों में पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी, पूर्व विधायक माविया अली, मौलाना मुजम्मिल अली, मुफ्ती अहसान कासमी, सभासद प्रतिनिधि अजय गांधी, सभासद जीशान नज्मी, बदल काजमी, हाजी रिहानुलहक समेत 14 लोग मौजूद रहे।

प्रदर्शकारियों की शिकायत है कि ना तो स्थानीय नेताओं और ना ही दारुल उलूम की तरफ से सीएए के खिलाफ उनके प्रदर्शन को समर्थन मिला है। महिलाओं का कहना है कि दारुल उलूम के दो वरिष्ठ मौलवी प्रदर्शनकारियों के साथ मध्यस्थता करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा गठित एक समिति का हिस्सा थे, लेकिन वे महिलाओं से मिलने नहीं आए।

दर्शन में शामिल इरम उस्मानी कहती हैं, ‘अगर दारुल उलूम हमसे कहता है कि महिलाएं घर चली जाएं और वो खुद सीएए, एनपीआर और एनआरसी को वापस कराने की जिम्मेदारी लेगा तो हम खुशी से घर लौट जाएंगे।’ हालांकि दारुल उलूम प्रतिनिधियों का कहना है कि मदरसे किसी प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका नहीं निभा सकते।

देवबंद मदरसे के प्रवक्ता अशरफ उस्मानी ने कहा कि मदरसे ने सीएए के खिलाफ बयान जारी किया है। इसके साथ ही कहा कि हम संविधान की आत्मा की रक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हैं, जहां भी ये प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘दारुल उलूम कोई राजनीतिक संस्था नहीं है। हम सिर्फ नैतिक समर्थन दे सकते हैं, मगर प्रदर्शन के किसी भी हिस्से में सक्रिय रूप से भाग नहीं ले सकते।’


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