सुप्रीम कोर्ट की सरकारों को नसीहत – सोशल मीडिया पर मदद मांग रहे लोगों को न दबाए

ऑक्सिजन और दवाइयों की कमी के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों सरकारों से सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई नागरिक सोशल मीडिया पर अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं, तो इसे गलत जानकारी नहीं बताया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मैं यहां पर एक गंभीर विषय उठाना चाहता हूं, अगर कोई भी नागरिक सोशल मीडिया या समाचारों पर अपनी शिकायतें दर्ज करते हैं, तो यह मानने का कोई कारण नहीं है कि यह सही नहीं है। सूचना पर क्लैंपडाउन नहीं हो सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “एक मजबूत संदेश सभी राज्यों में जाने दें कि हम इसे इस अदालत की अवमानना ​​मानेंगे कि अगर किसी नागरिक को ऑक्सीजन या बेड इत्यादि के लिए सोशल मीडिया या मीडिया पर बयान देने के लिए परेशान किया जाता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसा कोई अनुमान नहीं होना चाहिए कि नागरिकों द्वारा इंटरनेट पर की गई शिकायतें झूठी हैं। केंद्र ने हाल ही में ट्विटर को एक आदेश जारी कर कहा था कि कोवि’द के कुछ ट्वीट भारत के आईटी कानून के अनुपालन में नहीं थे। ट्विटर ने कुछ लोकप्रिय हैंडल से किए गए कई ट्वीट को हटा दिया, जिसमें संसद सदस्य रेवंत रेड्डी, पश्चिम बंगाल के मंत्री मोलोय घटक के हैंडल शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने देश में को’विद की स्थिति पर एक मुकदमे की सुनवाई करते हुए कहा, “हम इस बात से सहमत हैं कि पिछले 70 वर्षों में विरासत में मिला स्वास्थ्य ढांचा पर्याप्त नहीं है।” अदालत ने आगे कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक विराम बिंदु आ गया है और सेवानिवृत्त डॉक्टरों या अधिकारियों को फिर से नियोजित किया जा सकता है ताकि देश कोविद की दूसरी लहर से लड़’ने में मदद मिल सके।