अयोध्या में मस्जिद के शिलान्यास में सीएम योगी को दिया जाएगा न्योता: इंडो इस्लामिक ट्रस्ट

अयोध्या में बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की नींव रखी। इस मौके पर एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में यूपी के सीएम योगी ने अयोध्या में बन रही मस्जिद को लेकर कहा कि मस्जिद के शिलान्यास पर उन्हें कोई नहीं बुलाएगा और ना ही मैं जाऊंगा।

ऐसे में अब उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए गठित इंडो इस्लामिक ट्रस्ट ने मस्जिद के शिलान्यास में सीएम योगी को आमंत्रित करने की घोषणा की है। बता दें कि इंडो इस्लामिक ट्रस्ट को उच्चतम न्यायालय के आदेश पर वक्फ बोर्ड को मिली जमीन पर बनने वाली ‘जन सुविधाओं’ के लिए गठित किया गया है।

‘इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन’ ट्रस्ट के सचिव और प्रवक्ता अतहर हुसैन ने शनिवार को ‘भाषा’ को बताया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर अयोध्या जिले के धन्नीपुर गांव में वक्फ बोर्ड को मिली पांच एकड़ जमीन पर अस्पताल, लाइब्रेरी, सामुदायिक रसोईघर और रिसर्च सेंटर बनाया जाएगा। यह सभी चीजें जनता की सुविधा के लिए होंगी और जनता को सहूलियत देने का काम मुख्यमंत्री का होता है। इसी हैसियत से इनके शिलान्यास के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में न सिर्फ शिरकत करेंगे, बल्कि इन जन सुविधाओं के निर्माण के लिए सहयोग भी करेंगे।

हुसैन ने कहा कि इस्लाम के सभी चार विचार केंद्रों हनफी, हम्बली, शाफई और मालिकी में से किसी में भी मस्जिद की नींव रखने के लिए कार्यक्रम आयोजित करने का प्रावधान नहीं है, लिहाजा इस सवाल का कोई आधार नहीं बनता। मस्जिद का नाम ‘बाबरी मस्जिद’ रखे जाने के सवाल पर ट्रस्ट के सचिव ने कहा कि ऐसा कोई विचार नहीं है और ट्रस्ट द्वारा बनवाई जाने वाली किसी भी इमारत का अभी तक कोई नाम तय नहीं किया गया है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि मस्जिद-ए-नबवी और कुछ अन्य गिनी चुनी मस्जिदों को छोड़कर बाकी किसी भी मस्जिद का नाम मायने नहीं रखता। अल्लाह के नजर में मस्जिद में किए गए सजदे ही मायने रखते हैं, बाकी सब बेमानी है।

बता दें कि आज तक से बातचीत में योगी आदित्यनाथ ने कहा था  कि मेरा जो काम है वो काम मैं करूंगा। मैं अपने कार्य को हमेशा कर्तव्य और धर्म मानकर चलता हूं। मैं जानता हूं कि मुझे कोई बुलाएगा नहीं इसलिए मैं जाऊंगा भी नहीं। क्योंकि एक हिन्दू के रूप मुझे अपनी उपासना विधि का पालन करने का अधिकार है।” एक हिन्दू के रूप मुझे अपनी उपासना विधि का पालन करने का अधिकार है।”


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