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देश के बेरोज़गार युवा ‘पकौड़े तले’ और माध्यम वर्ग भारी टैक्स भरे, यही है अच्छे दिन?

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नई दिल्ली । 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने वादा किया था की उनकी सरकार बनने के बाद हर साल 2 करोड़ युवाओं को रोज़गार दिया जाएगा। लेकिन यह वादा कुछ अन्य वादों की तरह जुमला साबित हो रहा है। 2 करोड़ तो छोड़िए 2 लाख रोज़गार देने में सरकार के पसीने छूट रहे है। अब चूँकि युवा नौकरी को लेकर भाजपा से नाराज़ हो रहे है तो हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने एक नया रोज़गार का साधन उनको सुझाया है।

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मोदी ने कहा है कि ठेले पर पकौड़े तलना भी रोज़गार है। मोदी के इस बयान को विपक्ष ने आड़े हाथो लिया है। विपक्षी दलो ने विरोध स्वरूप कई जगह पर पकौड़े का ठेला भी लगाया है। सोमवार को समाजवादी पार्टी ने इस तरह का विरोध प्रदर्शन किया तो आज़म खान ठेले से पकौड़े ख़रीदने भी चले गए। मोदी का यह बयान भाजपा के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है।

इसलिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मोदी को कवर करने के लिए कह दिया की बेरोज़गारी से अच्छा है की युवा पकौड़े तले। सोमवार को राज्यसभा में अपना पहला भाषण देते हुए उन्होंने उपरोक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भीख माँगने से अच्छा है की कोई मज़दूरी करे। उसकी दूसरी पीढ़ी आएगी तो वह उधोगपति बनेगी। शायद वह कहना चाहते थे की लोग मेरे बेटे से सीखे की कैसे 50 हज़ार लगाकर 80 करोड़ रुपय कमाए जाते है।

देश के उच्च पदो पर बैठे लोगों के ऐसे बयान हैरान तो करते ही है लेकिन निराश भी करते है। जिस देश की युवाओं की आबादी विश्व में सबसे ज़्यादा है वहाँ रोज़गार के नाम पर पकौड़े तलने की सलाह देने हास्यपद से ज़्यादा घोर निंदनीय है। क्या सरकार सिर्फ़ भाषण देने और वादे करने के लिए होती है? अगर दम था तो ये बातें चुनाव प्रचार के समय कहते की हम 2 करोड़ युवाओं को हर साल पकौड़े तलने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

वैसे भी अगर कोई युवा अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए पकौड़े, मूँगफली, फलो का ठेला लगाता है तो इसमें सरकार का क्या योगदान है? अगर एक पढ़ा लिखा युवा मजबूरी में ठेला लगाता है तो सरकार इस पर अपनी पीठ न थपथपाए क्योंकि यह उसके लिए शर्म की बात है। सरकार केवल टैक्स लेने के लिए नही बनायी जाती बल्कि उस पैसे से लोगों को रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य देने के लिए होती है। लेकिन शायद हमसे टैक्स माननीयो के विदेशों में घूमने, बड़ी बड़ी गाड़ी में चलने और मोटी तनख़्वाह लेने के लिए लिया जाता है।

प्रशांत चौधरी

नोट: उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार है। इनका वोयस हिंदी से कोई सम्बंध नही है।

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