सीएए के खिलाफ UNHRC पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, भारत ने कहा- यह हमारा अंदरूनी मामला

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के उच्चायुक्त ने सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (सीएए) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। यूएनएचआरसी ने जेनेवा स्थित भारतीय मिशन को इस बात की जानकारी दी। हालांकि इस कदम पर भारत ने विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि सीएए भारत का अंदरूनी मामला है और यह संसद के कानून बनाने के संप्रभुता के अधिकार से संंबंधित है।

प्रवक्ता रवीश कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि जेनेवा में हमारे स्थायी मिशन को सोमवार शाम संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त (मानवाधिकारों) के लिए सूचित किया गया कि उनके कार्यालय ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सीएए में हस्तक्षेप करने को लेकर याचिका दायर की है।

आगे रवीश कुमार ने कहा, “हम दृढ़ता के साथ इस बात को मानते हैं कि किसी भी विदेशी संस्थानों के पास भारत की संप्रभुता से संबंधित मुद्दों में हस्तक्षेप करने का कोई हक नहीं है। भारत इस बात को स्पष्ट करता है कि सीएए संवैधानिक रूप से वैध है और अपने संवैधानिक मूल्यों की सभी आवश्यकताओं का पालन करता है।”

प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जिस पर कानून के मुताबिक शासन किया जाता है। हम सभी को अपनी न्यायपालिका पर पूरा भरोसा और सम्मान है। हमें पूरा विश्वास है कि हमारी आवाज़ और कानूनी रूप से स्थायी स्थिति सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मानी जाएगी।

बता दें कि यूएन ने पिछले साल दिसंबर में भारत में सीएए पर जनमत संग्रह कराए जाने की मांग ठुकरा दी थी। दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सरकार को चुनौती दी थी कि अगर उसे सीएए पर भरोसा है तो वह यूएन की निगरानी में इस पर जनमत संग्रह करवा ले। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा था कि यूएन जनमत संग्रह से जुड़े किसी भी मामले में सिर्फ राष्ट्रीय सरकार के अनुरोध पर ही जुड़ता है।


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