ब्रिटेन की अदालत ने भगोड़े विजय माल्या को दिवालिया घोषित किया

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भगोड़े भारतीय व्यवसायी विजय माल्या को सोमवार को ब्रिटिश अदालत ने दिवालिया घोषित कर दिया, जिससे भारतीय बैंकों को दुनिया भर में उसकी संपत्ति से धन वसूली की अनुमति मिल गई। यूके के उच्च न्यायालय के प्रेस कार्यालय के एक बयान के अनुसार, यूके की कंपनी और दिवाला न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।

कंपनी कोर्ट (अब दिवाला और कंपनी सूची का हिस्सा) इंग्लैंड और वेल्स के उच्च न्यायालय के चांसरी डिवीजन के भीतर एक विशेषज्ञ अदालत है, जो कंपनियों से संबंधित कुछ मामलों से संबंधित है। माल्या को दिवालियापन के फैसले के खिलाफ अपील करने के किसी भी अधिकार से वंचित कर दिया गया है।

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मुख्य दिवाला और कंपनी न्यायालय (ICC) के न्यायाधीश माइकल ब्रिग्स ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सुनवाई में कहा, ‘मैं डॉ माल्या को दिवालिया घोषित करता हूं।’ अपने आदेश में जज ने कहा, ‘इस बात के अपर्याप्त सबूत हैं कि लिया गया लोन याचिकाकर्ताओं को उचित समय के भीतर पूरी तरह से वापस कर दिया जाएगा।’

खुद के दिवालिया घोषित होने पर माल्या ने ट्वीट किया, ‘ईडी ने बैंकों की तरफ से मेरी 14,000 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है, जबकि कर्ज 6,200 करोड़ रुपये का ही था। ईडी ने 9 हजार करोड़ रुपये की नकद राश‍ि और 5 हजार करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां बैंकों को सौंप दी है। बैंकों ने इसीलिए कोर्ट से मुझे दिवालिया घोष‍ित करने को कहा, क्योंकि उन्हें ईडी को बाकी पैसे वापस करने पड़ते।’

बता दें कि माल्या के खिलाफ SBI के नेतृत्व में 13 बैंकों ने लंदन की अदालत में याचिका दायर की थी। इनमें बैंक ऑफ बड़ौदा, कॉर्पोरेशन बैंक, फेडरल बैंक लिमिटेड, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू और कश्मीर बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और जेएम फाइनेंशियल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के साथ-साथ एक अतिरिक्त लेनदार इस केस में मुख्य याचिकाकर्ता थे।

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