सुप्रीम कोर्ट का शरजील इमाम के खिलाफ विभिन्न अदालतों में केस चलाने पर रोक से इंकार

सुप्रीम कोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्र की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए शरजील इमाम के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर स्टे लगाने और देश की विभिन्न अदालतों में मुकादमा चलाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश से दो सप्ताह के भीतर इस मसले पर हलफनामा दायर करने को कहा है। सुनवाई के दौरान शरजील इमाम की ओर से वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि संबंधित राज्य सरकारों ने इस मामले पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। तब संबंधित राज्य सरकारों की ओर से पेश वकीलों ने जवाब दाखिल करने के लिए समय देने की मांग की।

तब दवे ने कहा कि हमें असम सरकार और दिल्ली सरकार से कोई परेशानी नहीं है। हमें डर है कि यूपी सरकार शरजील इमाम को प्रोडक्शन वारंट पर ले जा सकती है। तब जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि आपकी याचिका एफआईआर को एक जगह करने को लेकर है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जो भी होगा वो कानून के मुताबिक होगा।

उसके बाद कोर्ट इस मामले को चार हफ्ते के लिए टालना चाहती थी लेकिन दुष्यंत दवे ने इस जल्द सुनवाई करने की मांग की। उसके बाद कोर्ट ने 30, जून तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पिछले 26 मई को उत्तर प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर को नोटिस जारी की थी।

कोर्ट ने पहले सिर्फ दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था। पिछले 1 मई को कोर्ट केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। सुनवाई के दौरान शरजील इमाम की ओर से कहा गया था कि जामिया और अलीगढ़ में दो भाषण दिए। उन्हें खुद अपलोड नहीं किया।

बता दें कि इमाम पर भड़काऊ भाषण देकर दंगे भड़काने का आरोप है। पुलिस ने शरजील इमाम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए और 153ए के तहत आरोप लगाया है।