सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए सरकार को दी 15 दिन की मोहलत

कोरोना के चलते लगाया गया लॉकडाउन देश भर में प्रवासी मजदूरों पर बड़ी आपदा साबित हुआ है। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला देते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को 15 दिन में उनके घरों तक पहुंचाने की मोहलत दी है। इतना ही नहीं कोर्ट ने सरकारों को रोजगार के साथ रजिस्ट्रेश करने का बंदोबस्त करने के लिए भी कहा है।

प्रवासी मजदूरों के मसले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम जो करना चाहते हैं, वह आपको बताएंगे। हम सभी प्रवासियों को घर पहुंचाने के लिए 15 दिन का समय देंगे। सभी राज्यों को रिकॉर्ड पर लाना है कि वे कैसे रोजगार और अन्य प्रकार की राहत प्रदान करेंगे। प्रवासियों का पंजीकरण होना चाहिए।

इस दौरान सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अभी तक करीब एक करोड़ प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाया गया है। उन्होंने शीर्ष अदालत को बताया कि इनमें से करीब 41 लाख मजदूरों को सड़क मार्ग और 57 लाख मजदूरों को ट्रेनों से उनके गृह राज्य भेजा गया है।

मेहता ने कहा कि अधिकतर ट्रेनों का संचालन उत्तर प्रदेश और बिहार की तरफ हुआ है। उन्होंने अदालत को बताया कि इन कामगारों को उनके पैतृक स्थान पहुंचाने के लिए तीन जून तक 4200 से ज्यादा श्रमिक ट्रेनें चलाई गईं। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हम राज्यों से संपर्क में हैं और राज्य सरकारें ही अदालत को प्रवासियों की सही संख्या के बारे में बता सकती हैं।

उन्होने कहा, हमसे अभी भी 171 ट्रेन चलाये जाने का अनुरोध राज्यों द्वारा किया गया है और अगर कोई राज्य ट्रेन चलने के लिए अनुरोध करता है तो हम 24 घंटे के अन्दर उन तक ट्रेन मुहैय्या कराते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम सभी राज्यों को अपनी मांग रेलवे को सौंपने के लिए कहेंगे। आपके अनुसार, महाराष्ट्र और बिहार में अधिक ट्रेनों की आवश्यकता नहीं है?

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने कहा कि रजिस्ट्रेशन सिस्टम काम नहीं कर रहा है, जो एक बड़ी समस्या है। कोर्ट ने कहा कि आप कह रहे हैं कि इस प्रणाली के काम करने के तरीके में कोई समस्या है? उपाय क्या है?कॉलिन गोंसाल्वेस ने कहा कि आपके पास पुलिस स्टेशन या अन्य स्थानों पर स्पॉट हो सकते हैं, जहां प्रवासी जा सकते हैं और पंजीकरण फॉर्म भर सकते हैं। वहीं, वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि समस्या यह है कि इन प्रवासियों को किसी भी अन्य यात्रियों की तरह माना जा रहा है जो ट्रेन में यात्रा करना चाहते हैं।


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