शाहीनबाग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा – विरोध प्रदर्शन का अधिकार लेकिन निर्दिष्ट क्षेत्र में

करीब दो महीनों से नागरिकता कानून (CAA) के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी सड़क बंद नहीं कर सकते हैं और अन्य के लिए असुविधा पैदा नहीं कर सकते हैं।

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसफ की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह धरना प्रदर्शन कई दिनों से चल रहा है। एक कॉमन क्षेत्र में यह जारी नहीं रखा जा सकता, वरना सब लोग हर जगह धरना देने लगेंगे। क्या आप पब्लिक एरिया को इस तरह बंद कर सकते हैं। क्या आप पब्लिक रोड को ब्लॉक कर सकते हैं। प्रदर्शन बहुत लंबे अरसे से चल रहा है और प्रदर्शन को लेकर एक जगह सुनिश्चित होनी चाहिए।

सुनवाई के अंतिम क्षणों में जब याचिकाकर्ता ने अंतरिम आदेश जारी करने की मांग की लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कोई आदेश जारी करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह लोग 58 दिनों से धरने पर हैं. आप एक हफ्ते और इंतजार कर सकते हैं।

प्रदर्शन स्थल पर चार महीने के बच्चे की मौ*त के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज राज्य सरकार और केंद्र सरकार को नेटिस जारी किया। कोर्ट ने नवजात बच्चे की मौ*त पर कहा कि क्या चार महीने का बच्चा इस तरह के विरोध प्रदर्शनों में भाग ले सकता है।

पीठ ने कहा कि एक कानून है और इसके खिलाफ लोग हैं। मामला कोर्ट में लंबित है। इसके बावजूद कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। वे विरोध करने के हकदार हैं। बताते चलें कि बीजेपी नेता और पूर्व विधायक नंदकिशोर गर्ग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर शाहीन बाग धरने को हटाने के अलावा गाइडलाइन बनाने की मांग की है।


    देश के अच्छे तथा सभ्य परिवारों में रिश्ता देखें - Register FREE