रामायण पर ट्वीट को लेकर प्रशांत भूषण पर एफ़आईआर, गिरफ्तारी पर SC ने लगाई रोक

उच्चतम न्यायालय ने जाने माने वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ गुजरात में कथित तौर पर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में दर्ज की गई है। यह एफआईआर पूर्व सैन्य अधिकारी जयदेव रजनीकांत जोशी ने दर्ज कराई। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर शुक्रवार को रोक लगा दी और राज्य पुलिस से जवाब तलब किया।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की गयी सुनवाई के दौरान  भूषण की दलीलें सुनने के बाद गुजरात पुलिस को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया। न्यायालय ने राज्य पुलिस को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया। इस बीच खंडपीठ ने भूषण के ख़िलाफ़ किसी प्रकार की पुलिस कार्रवाई और उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी।

प्राथमिकी में उन धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सरकारी आदेशों पर बेवजह टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। जोशी ने आरोप लगाया है कि प्रशांत भूषण ने पूरे देश में कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत के दोबारा प्रसारण के खिलाफ ट्वीट कर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

जोशी ने अपनी शिकायत में भूषण पर आरोप लगाा कि उन्होंने 28 मार्च को एक ट्वीट में रामायण और महाभारत के लिए ‘अफीम’ शब्द का इस्तेमाल करके हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। बता दें कि भूषण ने ट्वीट कर कहा था कि जब जबरन लॉकडाउन के कारण देश को करोड़ों का नुकसान हुआ, तो सरकार दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत धारावाहिकों का प्रसारण शुरू कर लोगों को अफीम खिला रही है।

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सुनवाई में प्रशांत भूषण के वकील दुश्यंत दवे से पूछा कि आखिर टीवी पर कोई भी कुछ भी देख सकता है, आप कैसे कहेंगे कि अमुक चीजें न देखें। तब दवे ने कहा कि हम इस मुद्दे पर नहीं हैं कि लोग क्या देख रहे हैं हम एफआईआर के कंटेंट पर बात कर रहे हैं।

 


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