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Saturday, October 23, 2021

जैनुअल आबेदीन ने अपने बड़े बेटे को बनाया अजमेर दरगाह का दीवान

विश्व प्रसिद्ध हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (रह.) की दरगाह के दीवान सैय्यद जेनुअल आबेदीन ने आज अपनी गद्दी अपने बेटे सैय्यद नसुरुद्दीन को सौंप दी.

गरीब नवाज के 806वें उर्स के मौके पर शनिवार को अपने बड़े बेटे सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती को अपना उत्तराधिकारी एवं नायब सज्जादानशीन घोषित किया है. उन्होंने इस दौरान अपना एक वसीयतनामा भी जारी किया.

सज्जादानशीनों के सामने दरगाह के नए दीवान के नाम का एलान पूरे रस्मोरिवाज के साथ किया गया. साथ ही उनके सिर पर दस्तारबंदी की और उत्तराधिकारी के कागजात पर हस्ताक्षर किए. दरगाह दीवान बनने के बाद सैय्यद नसीरुद्दीन ने कहा कि दीवान साहब ने उन पर जो इस पद का भार दिया है उसे वे पूरी ईमानदारी के साथ निभाएंगे. नसीरुद्दीन को दरगाह दीवान घोषित करने पर विवाद शुरू हो चूका है.

दरगाह दीवान ने अपने बड़े बेटे को उत्तराधिकारी घोषित किया

दरगाह के दीवान जैनुअल आबेदीन अली खां द्वारा उर्स के मौके पर अपने पुत्र नसीरुद्दीन का अपना उत्तराधिकारी घोषित करने के मामले में गरीब नवाज सूफी मिशन सोसायटी के पदाधिकारियों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए दरगाह नाजिम को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि दीवान आबेदीन द्वारा जान-बूझकर उर्स के मौके पर लोगों की भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से इस तरह की घोषणा की है.

उन्होंने कहा कि दरगाह एक्ट के अनुसार आज तक इस प्रकार की कोई घोषणा नहीं की जा सकती और ना ही कोई उत्तराधिकारी बनाया जा सकता है. पत्र में अपील की गई कि दीवान के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए तुरंत प्रभाव से ऐसी घोषणा को रद्द करवाया जाए. आपत्ति करने वालों में सोसायटी के अध्यक्ष शेखजादा जुल्फिकार चिश्ती, पीर नफीस मियां चिश्ती, काजी मुनव्वर अली, अब्दुल नईम खान, सैयद गुलाम मुस्तफा आदि हैं.

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