असम में 5 लाख मुसलमानों के हो सकते है रोहिंग्या जैसे हालात

गुवाहाटी: भारत के पूर्वी राज्य असम में करीब पांच लाख मुस्लिमों की नागरिकता जाने का खतरा है. दरअसल वे अब तक वे दस्तावेज प्रदान करने में नाकाम रहे हैं कि 1971 से पहले उनके परिवार वहां रहते थे.

बता दें कि असम सरकार सरकार के नागरिकों की राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) में शामिल होने वालों की प्रारंभिक सूची प्रकाशित करने की तैयारी में जुटी है.

अधिकारियों का कहना है कि छह दशकों में पहली बार क्रियान्वित करने की प्रक्रिया – का उद्देश्य बांग्लादेश से अप्रतिबंधित आप्रवासियों का पता लगाकर उन्हें वापस भेजना है.

हालांकि आलोचकों का कहना है कि मुस्लिम नागरिकों को बांग्लादेशी मूल का  बताकर दीर्घकालिक शरणार्थियों के रूप में बनाने की धमकी की दी जा रही है. ऐसे में इन मुस्लिमों के हालात रोहंग्या मुस्लिमों के तरह होंगे.

असम 32 मिलियन आबादी है, जिनमें से एक तिहाई मुसलमान हैं. एनआरसी से जुड़े ताक हाजेला ने बुधवार को अल जजीरा को बताया कि आसाम में 4.8 मिलियन लोग नेप्रारंभिक सूची के प्रकाशन में अग्रिम रूप से उचित विरासत दस्तावेजों को उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं.