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शाह फैसल बोले – नौकरी जाने का डर नहीं, उमर अब्दुल्ला उतरे समर्थन में

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श्रीनगर: देश में तेजी से बढ़ती बलात्कार की घटनाओं के संबंध में व्यंग्यात्मक ट्वीट करने को लेकर केंद्र की मोदी सरकार के निशाने पर आए 2010 के यूपीएससी टॉपर शाह फैसल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार के इस फैसले पर शाह फैसल ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें नौकरी जाने का कोई डर नहीं है। उन्होंने कहा ‘मुझे पता है कि मेरी नौकरी जा सकती है लेकिन उसके बाद भी दुनिया संभावनाओं से भरी हुई है।’

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फैसल ने इसी के साथ कहा ‘सरकारी अधिकारियों की एक छवि लोगों के जहन में बनी हुई है। उस छवि के अनुसार वह बहस नहीं कर सकते। उनके चारों ओर जो भी हो रहा है उसे देख कर बस वह अपनी आंखें मूंद सकते हैं। लेकिन अब इस छवि को बदलना होगा।’

दरअसल, कुछ दिनों पहले शाह फैसल ने रेप की बढ़ती घटनाओं पर ट्वीट किया था। जिसमे उन्होने लिखा था – ‘पैट्रिआर्की + पॉपुलेशन + इलिट्रेसी + अल्कोहल + पोर्न + टेक्नोलॉजी + एनार्की = रेपिस्तान।’

केंद्र सरकार ने आईएएस अधिकारी के इस ट्वीट को ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट रूल्स), 1968 और ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 के खिलाफ मानते हुए कारवाई के आदेश दिये है। केंद्र के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के आयुक्त-सह-सचिव ने फैसल को पत्र लिखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई के बारे में सूचित किया।

नोटिस मिलने के बाद उसकी एक प्रति ट्वीट करते हुए फैसल ने लिखा है, दक्षिण एशिया में बलात्कार के चलन के खिलाफ मेरे व्यंग्यात्मक ट्वीट के एवज में मुझे मेरे बॉस से प्रेम पत्र (नोटिस) मिला। विडंबना यह है कि अंतरआत्मा की आजादी का दम घोंटने के लिए औपनिवेशिक रूह वाले सर्विस रूल्स को लोकतांत्रिक भारत में अमल में लाया जा रहा है। मैं इसे (केंद्र की चिट्ठी) इसलिए साझा कर रहा हूं ताकि मौजूदा नियमों में बदलाव की जरूरत को रेखांकित किया जा सके।’

इस मामले मे पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि मैं इस नोटिस को नौकरशाही के अतिउत्साह में आकर उठाए गए मामले के रूप में देखता हूं। वे उस समय की भावना को समझ नहीं पा रहे हैं, जिसमें हम रह रहे हैं। उमर ने कहा कि ऐसा लगता है कि डीओपीटी ने प्रशासनिक सेवाओं से शाह फैजल को निकालने का मन बना लिया है। इस पेज की आखिरी पंक्ति चौंकाने वाली और अस्वीकार्य है जहां वे फैजल की सत्यनिष्ठा और ईमानदारी पर सवाल उठाते हैं। एक व्यंग्यात्मक ट्वीट बेईमानी कैसे है? यह उन्हें भ्रष्ट कैसे बनाता है?

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