SC ने मोदी सरकार से पूछा – लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों को न्यूनतम वेतन क्यों न दी जाए?

नई दिल्ली. प्रवासी मजदूरों को न्यूनतम वेतन देने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी की मोदी सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि लॉकडाउन से प्रभावित प्रवासी मजदूरों और छोटे कारोबारियों को न्यूनतम वेतन क्यों न दी जाए?

दरअसल, मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर और अंजलि भारद्वाज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रवासी मजदूरों को न्यूनतम वेतन देने की मांग की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से लागू हुए लॉकडाउन के कारण वे ही सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।  याचिका में कहा गया है कि कोरोना वायरस को लेकर देश भर में लागू लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूरों के बीच अनिश्चितता का माहौल है।

हालांकि अदालत ने लॉकडाउन के दौरान शहरों से अपने पैतृक गांव लौट रहे बेरोजगार कामगारों के रहने के लिए होटलों और रिजार्ट का आश्रय गृहों के रूप में इस्तेमाल करने का निर्देश देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया और कहा कि सरकार को हर तरह के विचारों पर ध्यान देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी उस वक्त की जब केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस संबंध में दायर एक अर्जी पर आपत्ति की। मेहता ने कहा कि इन कामगारों के आश्रय स्थल के लिए राज्य सरकारों ने पहले ही स्कूलों और ऐसे ही दूसरे भवनों को अपने अधिकार में ले लिया है।

न्यायालय में पेश आवेदन में आरोप लगाया गया था कि पलायन करने वाले कामगारों को जहां ठहराया गया है वहां सफाई की समुचित सुविधाओं का अभाव है। पीठ ने कहा कि सरकार को तमाम सारे विचारों को सुनने के लिये न्यायालय बाध्य नहीं कर सकता क्योंकि लोग तरह तरह के लाखों सुझाव दे सकते हैं।लॉकडाउन की वजह से शहरों से पैतृक गांवों की ओर पलायन करने वाले दैनिक मजदूरों का मुद्दा पहले से ही न्यायालय के विचाराधीन है।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने 31 मार्च को केंद्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि पलायन कर रहे इन कामगारों को आश्रय गृह में रखा जाए और उनके खाने-पीने और दवा आदि का बंदोबस्त किया जाए। शीर्ष अदालत ने इन कामगारों को अवसाद और दहशत के विचारों से उबारने के लिए विशेष सलाह देने के लिए विशेषज्ञों और इस काम में विभिन्न संप्रदायों के नेताओं की मदद लेने का भी निर्देश दिया था।


    देश के अच्छे तथा सभ्य परिवारों में रिश्ता देखें - Register FREE