कोरोना: सुप्रीम कोर्ट का आदेश – 7 साल तक की सजा पाए कैदियों को पेरोल देने पर हो विचार

देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए कहा कि जिन कैदियों को किसी मामले में 7 साल या उससे कम की सजा दी गई है और वह जेल में बंद हैं, तो उन्हें पेरोल या अंतरिम जमानत दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला इसलिए सुनाया है, ताकि जेलों में भीड़-भाड़ को कम किया जा सके।

कोर्ट ने कैदियों को 6 हफ्ते के लिए पैरोल देने का कहा है। कोर्ट द्वारा जारी किए गए इस फैसले से जेलों में मौजूद हजारों कैदियों को पैरोल मिलने का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि राज्य सरकारें इसे लेकर हाई पॉवर कमेटी का गठन करें। इस समिति में लॉ सेकेट्ररी, राज्य लीगल सर्विस ऑथोरिटी के चैयरमैन, जेल के डीजी को शामिल किया जाए। ये कमेटी तय करेगी कि 7 साल की सज़ा वाले मामलो में किन सजायाफ्ता दोषियो और अंडर ट्रायल कैदियों को पैरोल या अन्तरिम ज़मानत पर छोड़ा जा सकता है। गौरतलब है कि कोर्ट ने इस मामले में खुद ही संज्ञान लिया है।

आदेश में कहा गया, “हमने हर राज्य को विधि सचिव और विधिक सेवा प्राधिकरण के चेयरमैन को शामिल करते हुए हाई पावर कमेटी बनाने को कहा है जो ये तय करेगी कि किस कैटेगरी के दोषसिद्ध कैदियों या विचाराधीन कैदियों को पैरोल या अंतिरम जमानत पर छोड़ा जा सकता है।”

इसके अलावा शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा कि संक्रमण से बचाव के लिए कोर्ट परिसर में सभी वकीलों के चेंबर अलगे आदेश तक बंद रहेंगे। साथ ही कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी पर अगले आदेश तक रोक रहेगी। केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जरूरी मामलों की सुनवाई होगी।


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