CAA के खिलाफ मुस्लिम और छात्र संगठनों की याचिका पर सुनवाई करेगी सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के नए सिरे से सुनवाई करने पर सहमति जताई, लेकिन इस पर रोक के लिए कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और हृषिकेश रॉय की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी कर याचिकाओं पर अपनी प्रतिक्रिया मांगी और उन्हें सीएए के खिलाफ पहले दायर अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया। अदालत ने तमिलनाडु तौहीद जमात, ऑल असम लॉ स्टूडेंट्स यूनियन, मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (असम) और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर आदेश पारित किया। इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत में अब तक 150 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) प्रमुख याचिकाकर्ता है। पिछले साल दिसंबर में शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह सीएए की संवैधानिक वैधता की जांच करेगी, लेकिन अदालत ने कानून के संचालन पर रोक से इनकार कर दिया था। सीएए के खिलाफ लगभग 160 याचिकाएं दायर की गई हैं।

एक याचिका में कहा गया है कि यह सीएए की घोषणा के संबंध में महत्वपूर्ण सवाल उठा रहा है, जहां पहली बार धर्म को तीन पड़ोसी देशों के अनिर्दिष्ट प्रवासियों के लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए एक शर्त के रूप में पेश किया गया है। दलील दी गई कि व्यक्ति की धार्मिक पहचान के आधार पर वर्गीकरण धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांत के खिलाफ है, जो संविधान का एक अभिन्न अंग है।

मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 1985 के असम समझौते के सीधे विरोधाभास और नागरिकता अधिनियम की धारा 6 ए के तहत था और संशोधन को असंवैधानिक और अवैध घोषित करने के लिए अदालत से गुहार लगाई।


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