सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ दी जगन्नाथ रथ यात्रा निकालने की दी इजाजत

उच्चतम न्यायालय ने ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकालने की अनुमति दे दी है। हालांकि कोर्ट ने ये इजाजत कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के मद्देनजर कुछ शर्तों के साथ दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि पुरी की रथयात्रा का आयोजन मंदिर समिति, राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से आयोजित की जाये, लेकिन इस बात का खास ख्याल रखा जाये कि स्वास्थ्य के मुद्दों को दरकिनार ना किया जाये। अगर हालात बेकाबू होते दिखें तो सरकार यात्रा या उत्सव को रोक सकती है। साथ ही कहा कि पुरी के अलावा ओडिशा में कहीं और यात्रा नहीं निकाली जाएगी।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मामले का उल्लेख करते हुए सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है। अगर भगवान जगन्नाथ को कल बाहर नहीं लाया गया तो परंपरा के मुताबिक उन्हें अगले 12 साल तक बाहर नहीं निकाला जा सकता है।’ मेहता ने कहा कि एहतियात बरतने के साथ ही राज्य सरकार एक दिन के लिए कर्फ्यू लगा सकती है।

मेहता ने पीठ से कहा, च्च्सभी ‘सेबायत’ और ‘पंडा’’, जो कोविड-19 की जांच में संक्रमित नहीं पाए गए हैं, वे श्री शंकराचार्य के निर्णय के अनुरूप अनुष्ठानों में हिस्सा ले सकते हैं। लोग एकत्र न हों और वे लाइव प्रसारण के दौरान टीवी पर दर्शन कर सकते हैं। पुरी के राजा और मंदिर समिति इन अनुष्ठानों के प्रबंधों का पर्यवेक्षण कर सकती है।’ पुरी रथ यात्रा में दुनिया भर से लाखों लोग शामिल होते हैं और यह 23 जून से निर्धारित है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 जून को रथयात्रा पर रोक के फैसले में कहा था कि कोरोना महामारी के समय यात्रा की परमिशन दी तो भगवान जगन्नाथ हमें कभी माफ नहीं करेंगे। कोर्ट ने कहा था कि जब महामारी फैली हो, तो ऐसी यात्रा की इजाजत नहीं दी जा सकती, जिसमें भारी भीड़ आती हो। लोगों की सेहत और उनकी हिफाजत के लिए इस साल यात्रा नहीं होनी चाहिए।


    देश के अच्छे तथा सभ्य परिवारों में रिश्ता देखें - Register FREE