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52 अमरनाथ यात्रियों की जान बचाने वाले सलीम शेख़ को मिला वीरता पुरस्कार

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नई दिल्ली । देश आज 69वा गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौक़े पर दिल्ली के राजपथ पर हर साल की तरह गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन किया गया। इसके अलावा राष्ट्रपति ने देश के रक्षको को वीरता पुरस्कारों से नवाज़ा। यही नही उन लोगों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बग़ैर दूसरे लोगों की जान बचाई। ऐसे ही एक शख़्स का नाम है सलीम शेख़।

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सलीम शेख़ को बहादुरी के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार से नवाज़ा गया। उन्हें बहादूरी के लिये उत्तम जीवन रक्षक पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें एक लाख रुपय का इनाम भी दिया गया। सलीम शेख़ को यह पुरस्कार उनकी उस बहादुरी के लिए दिया गया जिसकी वजह से 52 अमरनाथ यात्रियों की जान बच सकी। यह सलीम शेख़ की बहादुरी और सूझ बूझ ही थी की उसने आतंकियो की ताबड़तोड़ फ़ायरिंग के बीच यात्रियों को सुरक्षित निकाला।

कहावत भी है की मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। इसलिए ऐसे लोगों का सम्मान भी होना चाहिए। दरअसल आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में हिंसा भड़क गयी थी। इस हिंसा की चपेट में अमरनाथ यात्री भी आ गए। इस दौरान कई बार अमरनाथ यात्रियों पर हमला किया गया। एक ऐसा ही हमला अनंतनाग में हुआ। यहाँ श्रद्धालुओं से भरी एक बस पर आतंकियो ने हमला बोल दिया।

बस पर आतंकी ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसा रहे थे ऐसे में बस के ड्राइवर सलीम शेख़ ने बहादुरी का परिचय देते हुए बस को तेज़ी से दौड़ा दिया। इस दौरान आतंकी गोलियाँ चलाते रहे लेकिन अपनी जान की परवाह किए बग़ैर सलीम बस दौडाता रहा। सलीम ने वह बस सुरक्षकर्मियों की चौकी पर लाकर रोक दी। लेकिन इस गोलीबारी में 7 अमरनाथ यात्रियों की मौत हो गयी। हालाँकि क़रीब 52 यात्री सलीम की वजह से सुरक्षित बच गए।

बहादुरी का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार मिलने पर सलीम ने ख़ुशी जताते हुए कहा,’ उसे अफसोस इस बात का है कि वो उन 7 यात्रियों को नहीं बचा पाया, जो आतंकवादियों की गोली का शिकार हो गये। हालांकि खुशी भी है कि मेरी उस वक्त सूझबूझ काफ़ी अमरनाथ यात्रिओं की जान बच गयी।’

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