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Tuesday, November 30, 2021

फिर जाग उठा एनआरसी का जिन्न, भागवत ने बढ़ती मुस्लिम आबादी का आरोप लगाते हुए….

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को जनसंख्या नीति और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करने की मांग की। और आरोप लगाया गया कि मुसलमानों और ईसाइयों की बढ़ती संख्या भारत में “जनसंख्या असंतुलन” पैदा कर रही है।

नागपुर में आयोजित वार्षिक विजयादशमनी कार्यक्रम में बोलते हुए, उन्होंने आरएसएस अखिल भारतीय कार्यकर्ता मंडल (एबीकेएम) के 2015 के संकल्प को दोहराया। यह प्रस्ताव कहता है कि “भारतीय मूल” के धर्मों का हिस्सा – हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म और इस्लाम और ईसाई धर्म को छोड़कर – 2011 की जनगणना में 1951 में 88 प्रतिशत से घटकर 83.8 प्रतिशत हो गया। जबकि उस अवधि के दौरान मुस्लिम आबादी 9.8 प्रतिशत से बढ़कर 14.23 प्रतिशत हो गई।

प्रस्ताव में ये भी कहा गया, सीमावर्ती राज्यों असम बांग्लादेश और बिहार में मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से बहुत अधिक रही है। यह स्पष्ट रूप से बांग्लादेश से बेरोकटोक घुसपैठ की और संकेत करता है।

भागवत ने आगे कहा कि इस्लाम और ईसाई धर्म जैसे धर्म आक्र’मण के माध्यम से आए और यहूदी और पारसी शरण लेने के लिए भारत आए। मुसलमानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे क्वार्टरमास्टर अब्दुल हामिद या हसन खान मेवाती जैसे देशभक्तों का अनुसरण कर सकते हैं जिन्होंने राणा सांगा के साथ बाबर से लड़ा’ई की थी।

भागवत, जिन्होंने पूरे प्रस्ताव को नहीं पढ़ा, ने राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करने की आवश्यकता की भी वकालत की। उन्होंने कहा, “एनआरसी हालांकि उन लोगों के लिए नहीं है जो पीढ़ियों से भारत में नागरिक के रूप में रह रहे हैं।”

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