गहलोत सरकार का फैसला: रोजेदार शिक्षकों की नहीं लगेगी कोरोना महामारी में ड्यूटी

कोरोना संकट के बीच राजस्थान सरकार ने प्रदेश में एक जुलाई से स्कूल खोलने का बड़ा फैसला लिया है। इस सबंध में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह दोस्तारा ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करीब  50 से अधिक शिक्षक संस्‍थाओं के साथ मीटिंग आयोजित की।

इस दौरान मंत्री ने ये भी बताया कि स्टूडेंट्स के लिए स्कूल 1 जुलाई से खुलेंगे, लेकिन टीचर्स को स्कूल खुलने से पहले ही 26 या 27 जून को स्कूलों में अपनी ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करना होगा। मंत्री ने ये जानकारी भी दी कि हालातों को देखते हुए अकेडमिक कैलेंडर में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं।

मंत्री ने आगे कहा कि इंग्लिश मीडियम स्कूलों में एडमिशन जल्द ही शुरू किए जाएंगे और एडमिशन की प्रक्रिया ऑनलाइन ही चलेगी। दरअसल, मीटिंग में टीचर ऑर्गेनाइजेशन ने ये सुझाव दिया कि कोरोनावायरस की वजह से पहले से ही देरी हो गई है।

इसके साथ ही उन्होने ये भी घोषणा करते हुए कहा कि कोरोना की इस महामारी में रोजेदार शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगेगी। डोटासरा ने कहा कि रमजान इबादत का महीना है। पूरी पाकीजगी के साथ रोजे के फराइज को अंजाम देना होता है। उन्हें कोई असुविधा न हो, इसलिए हमारी सरकार ने रोजा रखकर कोरोना संकट में योद्धा बनकर ड्यूटी कर रहे शिक्षकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी ड्यूटी नहीं लगाने का फैसला किया है। इसके लिए सभी पीईईओ को निर्देशित किया गया है।

हालांकि राजस्‍थान के पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री ने सरकार के फैसले पर कड़ा एतराज जाहिर किया है। वासुदेव देवनानी ने न्यूज़ 18 से कहा कि सरकार का कोरोना पर ध्यान नहीं है। उसे अपने वोट बैंक को बचाने की फिक्र है, इसलिए ऐसे फरमान निकाले जा रहे हैं। गहलोत सरकार तुष्टिकरण से ऊपर उठ जाती तो आज प्रदेश में कोरोना इतना नहीं फैलता।


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