गोपाल राय ने NPR के खिलाफ दिल्ली विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव

नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा में भी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी NPR और NRC के खिलाफ आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने आज प्रस्ताव पेश कर दिया।

आप सरकार में मंत्री गोपाल राय ने प्रस्ताव रखते हुए कहा कि एनपीआर से देश में ज्यादातर लोग परेशान होंगे। राय ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह चाहे जो भी आश्वासन दें, लेकिन वे एनपीआर के 2003 के नियमों के तहत बाद में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) लाकर रहेंगे।

राय ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने नागरिकता कानून में बदलाव किया था, जिसके आधार पर यह तय हुआ था कि एनपीआर का डेटा नागरिकता के साथ जोड़ा जाएगा। इसी के तहत बाद में वेरीफिकेशन की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। संदिग्ध लोगों का डेटा डाउटफुल (डी) के वर्ग में रखा जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि एनपीआर में कोई डी कैटेगरी नहीं होगी। लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि वे सिर्फ 2003 के नियम अपना रहे हैं और यह नियम कहते हैं कि एनपीआर के डेटा के आधार पर ही एनआरसी के लिए जानकारी जुटाई जाएगी।”

राय ने गृह मंत्री के ऐलान पर सवाल खड़े करते हुए पूछा कि आखिर वे किस आधार पर एनआरसी नहीं होने की बात कह रहे थे। क्या 2003 के नियम बदले गए हैं? अगर नहीं, तो एनआरसी की प्रक्रिया अपने आप एनपीआर के बाद होगी। राय ने कहा कि हर शख्स इससे चिंता में है। असम में हुई एनआरसी प्रक्रिया का जिक्र करते हुए राय ने कहा कि एनआरसी और एनपीआर का धर्म से कोई लेना-देना नहीं। बता दें कि असम में एनआरसी के तहत 19 लाख हिंदू और मुस्लिमों के नाम नागरिकता रजिस्टर से बाहर कर दिए गए थे।

दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने कहा कि लोगों के मन में एनपीआर-एनआरसी को लेकर कई सवाल हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री हर बार इन मुद्दों पर अलग बयान देते हैं। कल शाह संसद में कह रहे थे कि एनपीआर और एनसीआर में कोई लिंक नहीं है, जबकि कुछ महीनों पहले ही वे क्रोनोलॉजी समझा रहे थे। इसलिए दिल्ली में एनपीआर अपडेशन को रोक देना चाहिए और अगर केंद्र सरकार जोर डालती है, तो इसे 2010 के फॉर्मेट में ही कराया जाना चाहिए।


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