रंजन गोगोई को राज्यसभा भेजे जाने पर बोले सहयोगी जज – आखिरी पिलर भी ढह गया?

पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगई को राज्यसभा में नामांकित किए जाने पर उनके पूर्व सहयोगी जस्टिस (रिटायर्ड) मदन बी लोकुर ने सख्त टिप्पणी की।

द इंडियन एक्सप्रेस से जस्टिस लोकुर ने कहा, “कुछ समय से अटकलें लगाई जा रही थीं कि जस्टिस गोगोई को क्या सम्मान मिलेगा। तो, ऐसे में उनका नामांकन आश्चर्यजनक नहीं है लेकिन जो आश्चर्य की बात है, वह यह है कि यह फैसला इतनी जल्दी आ गया। यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और अखंडता को फिर से परिभाषित करता है। क्या आखिरी किला भी ढह गया है?” बता दें कि आखिरी पिलर से मुराद उनकी न्यायपालिका से थी।

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा है कि पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगई अगर राज्यसभा सीट का ऑफर स्वीकार कर लेंगे तो वह ज्यूडिश्यरी (न्याय-तंत्र) की छवि को बहुत बड़ा झटका देंगे। यह नुकसान इतना अधिक होगा कि उसका आकलन भी नहीं किया जा सकेगा।

उन्होने ट्वीट किया, “मुझे उम्मीद है कि पूर्व सीजेआई रंजन गोगई इस राज्यसभा सीट की पेशकश को ‘न’ कहने की समझ रखते हैं। अन्यथा वह ज्यूडिश्यरी की छवि को बेहिसाब नुकसान पहुंचाएंगे।”  बता दें सरकार ने सोमवार को पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। इस संबंध में एक अधिसूचना गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई।

अधिसूचना में कहा गया, ‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (1) के उपखंड (ए), जिसे उस अनुच्छेद के खंड (3) के साथ पढ़ा जाए, के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रपति को रंजन गोगोई को राज्यसभा में एक सदस्य का कार्यकाल समाप्त होने से खाली हुई सीट पर मनोनीत करते हुए प्रसन्नता हो रही है।’


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