पूर्व CJI रंजन गोगोई राज्यसभा के लिए नोमिनेट, ओवैसी ने उठाए सवाल

पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को राज्यसभा सदस्य के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नोमिनेट किया है। पूर्व सीजेआई ने अयोध्य राम मंदिर समेत कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला सुनाया था.

सरकारी अधिसूचना में कहा गया है, ”भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (3) के साथ पठित खंड (1) के उपखंड (क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति, एक नामित सदस्य की सेवानिवृति के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए, राज्यसभा में श्री रंजन गोगोई को नामित करते हैं.” यह सीट केटीएस तुलसी का राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने से खाली हुई थी.

इस बीच, जस्टिस रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामित किए जाने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं. एआईएमआईएम मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘क्या यह ‘इनाम है’? लोगों को जजों की स्वतंत्रता में यकीन कैसे रहेगा? कई सवाल हैं.’

बता दें कि जस्टिस गोगोई ही थे जिन्होंने 10 जनवरी 2018 को तीन अन्य वरिष्ठ जजों के साथ मिलकर तब के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ संयुक्त प्रेस वार्ता की थी. जजों ने आरोप लगाया था कि जस्टिस मिश्रा न्यायपालिका की स्वयात्तता से खिलवाड़ कर रहे हैं.

जस्टिस गोगोई असम के मुख्यमंत्री रहे केशब चन्द्र गोगोई के बेटे हैं. उन्होंने 1978 में वकालत शुरु की. 2001 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के स्थाई जज बने. 2011 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने और 23 अप्रैल 2012 को सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए. उनकी छवि एक बेहद सख्त और ईमानदार जज की रही.


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